नई दिल्ली । केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने बायोमेडिकल कचरे के प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता जताई है ताकि विशेष रूप से महामारी जैसी स्थिति में स्वास्थ्य और पर्यावरण पर दबाव कम किया जा सके। उनका संदेश हाल ही में एक वेबिनार में पढ़ा गया। इंडिया वाटर फाउंडेशन (आईडब्ल्यूएफ) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा पर्यावरणीय कार्यनीति के जरिए भारत सहित सदस्य देशों में लोगों के संरक्षण में सहायता के लिए इन दोनों संगठनों का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि "आज बायोमेडिकल कचरे का प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस तरह के बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए पहले से बनाए गए नियमों और विनियमों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल और स्वच्छता विभाग की सहायता से 'इंडिया वाटर फाउंडेशन (आईडब्ल्यूएफ) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा हाल ही में संयुक्त रूप से ''कोविड-19 के बीच तरल कचरा प्रबंधन का भविष्य : भावी रणनीति'' विषय पर एक उच्च स्तरीय वेबिनार आयोजित किया गया। वेबिनार में तरल अपशिष्ट प्रबंधन और जैव चिकित्सा अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया। वेबिनार का मुख्य उद्देश्य सामाजिक-पर्यावरणीय प्रभावों के साथ-साथ कोविड-19 के संदर्भ में अपशिष्ट प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर समग्र रूप से विचार-विमर्श करना था। 2020 की शुरुआत में कोविड-19 महामारी के अचानक आने से अपशिष्ट जल क्षेत्र सहित दुनिया भर में समुदायों पर स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ पड़ा है। इस महामारी ने समाज के हर क्षेत्र को दुष्प्रभावित किया है। बायोमेडिकल कचरे की सभी श्रेणियों के बीच, तरल अपशिष्ट मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। अनुचित रखरखाव और सही तरीके से निपटान न होने की वजह से यह अपशिष्ट जलसंभरों, भू-जल और पीने के पानी में मिलकर उन्हें दूषित कर देता है। प्रोफेसर आशुतोष शर्मा, सचिव, डीएसटी, ने इस कचरे से निपटने के लिए पिछले 4-5 महीनों में विकसित किए नवाचारों पर प्रकाश डाला। इनमें चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, त्रिवेंद्रम द्वारा अस्पतालों के लिए विकसित कचरे के ऐसे डिब्बे शामिल थे, जिनकी भीतरी परत वायरस को बेअसर करने में कारगर है। ये डिब्बे अब व्यावसायिक रूप से उत्पादित किये जा रहे हैं।