कोलकाता । पश्चिम बंगाल में कोरोना मरीजों की संख्या 572 नहीं बल्कि 931 है। यह जानकारी राज्य सरकार की एक चिट्ठी से सामने आई है। दरअसल राज्य सरकार ने हेल्थ बुलेटिन में 30 अप्रैल की शाम तक राज्य में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 572 बताई है। जबकि उसी दिन केंद्र सरकार को एक चिट्ठी राज्य के स्वास्थ्य सचिव विवेक कुमार ने लिखी है जिसमें लिखा है कि बंगाल में पुराने मरीजों की संख्या 931 है।

आंकड़ों की यह विषमता सामने आने के बाद राज्य सरकार के कार्यकलापों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल सरकार कोरोना संक्रमण के आंकड़ों पर पर्दा डाल रही है और राज्य वासियों तथा केंद्र सरकार को अलग-अलग जानकारी दे रही हैं। शनिवार को राज्यपाल ने एक ट्वीट किया है जिसमें राज्य सरकार के हेल्थ बुलेटिन और केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठियों को साझा किया है।

इसमें देखा जा सकता है कि हेल्थ बुलेटिन में सरकार इस बात का दावा करती है कि पश्चिम बंगाल में कोरोना पॉजिटिव मामले 572 हैं जबकि केंद्र सरकार को जो चिट्ठी लिखी है उसमें यह संख्या 931 बताई है। इसे लेकर राज्यपाल ने ममता बनर्जी को पारदर्शिता बरतने की नसीहत दी है। अपने दो ट्वीट में राज्यपाल ने लिखा कोविड‑19 संक्रमण के आंकड़ों पर पर्दा डालने के अभियान को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बंद करना चाहिए। इसे पारदर्शी रूप से साझा करें। राज्य सरकार ने 1 मई को कोई हेल्थ बुलेटिन जारी नहीं किया। 30 अप्रैल को जो बुलेटिन था उसमें बताया गया कि राज्य में 572 कोरोना मामले हैं। जबकि उसी दिन केंद्र सरकार को राज्य ने एक चिट्ठी लिखी जिसमें लिखा है कि राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या 931 है। आखिर आंकड़ों में यह विषमता क्यों? यह सामंजस्य नहीं होने का परिणाम है।

आज जब लोग कोरोना के महासंकट से गुजर रहे हैं तब राज्य सरकार के आंकड़ों में इस तरह की विषमता और समन्वय की भारी कमी चिंताजनक है। ममता सरकार को चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों को गिद्ध से तुलना करने और शव के इंतजार करने वाले अपने बयान को वापस लें और सभी को एक साथ लेकर बैठक करें। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल सरकार पर कोरोना के आंकड़े छिपाने के आरोप लगातार लग रहे थे। अब इस नई चिट्ठी के बाद स्पष्ट हो चला है कि सरकार ने कोरोना संक्रमण से संबंधित आंकड़ों में भारी विषमता बरती है।‌