सत्ता जब बहुमत  में होती हैं और शासक को लगता हैं की में जब तक भी रहूँगा शासन मेरा ही रहेगा यह उसका  भरम  हैं .और भरम में जीना  बुद्धिमानी  नहीं हैं .यह शास्वत सत्य  हैं की इस जगत  में कोई स्थायी  नहीं होता हैं और हमेश इतिहास  दुहराया  जाता हैं आजकल केंद्र और राज्य सरकार नेहरू  गाँधी परिवार की विरासत   को मिटाने  में जुटी  हैं .नाम बदल जायेंगे पर उनके द्वारा स्थापित मूल्य  नहीं समाप्त  होंगे कमल  को गुलाब नहीं कह सकते और न गुलाब कमल होगा .
इतिहास गवाह  हैं की पूर्व के शासकों  ने  कभी भी पुराने  शासको  द्वारा स्थापित मूल्यों  को नहीं मिटाया या हटाया  .उससे क्या कुछ नया  घटता  हैं  .क्या आप सत्ता के शीर्ष  पर बैठना  चाहते हैं तो अपने से वरिष्ठ  को सत्ता से च्युत  करे.आज आप कितने  नाम बदलेंगे  कल कोई नया शासक आएगा  वह भी इतिहास दुहरायेना .यह अच्छी बात नहीं हैं आप अपनी लकीर  बढ़ाओ  ना  की दूसरे की लकीर  मिटाओ .जैसे शासक ने अपने नाम से स्टेडियम  का नामकरण किया यह सही किया पर दूसरे के नाम की जगह अपनों  को उपकृत  करना उचित नहीं .
आपको राजीव  गाँधी खेल  रत्न  पुरुस्कार  की जगह कोई नया पुरूस्कार  समतुल्य  बनाकर   देते तो उचित होता  पर उसकी जगह दूसरे का नाम रखना  यानी बासी  कुर्सी  पर बैठाना  या  जूठन  खिलाना.आपकी पार्टी में बहुत योग्यतम  व्यक्ति हैं जिन्होंने  देश के निर्माण में अतुलनीय  योगदान  दिया  हैं उनके नाम से अन्य नए  नए  नाम रखे दूसरों  के नाम  मिटाकर  अपना नाम लिखना  उचित नहीं हैं .नेहरूगाँधी  परिवार में इंदिरा  के बाद राजीव रहे और राजीव  के बाद राहुल हैं  पर वर्तमान शासक का कौन परिवार का सदस्य   हैं खाना पूर्ती के लिए .आजकल कहते हैं परिवारवाद  का चलन बढ़ता जा रहा हैं  अरे  भाई जिसका परिवार होगा उसका वंश  बढ़ेगा  जिनका  परिवार ही नहीं हैं या रहा या था वे किसको  बढ़ाएंगे  हैं
इतिहास अपनी पुनरावृत्ति करता हैं  दुहराया जाता हैं   .जिस प्रकार बाबरी  मस्जिद  का नाम राम  मंदिर  हुआ अच्छी  बात हुई .तत्कालीन  शासक   ने अपना नाम रखा  वैसे ही नए शासक अपने प्रभाव का उपयोग कर नया नाम रखेंगे यह अंतहीन   कार्यवाही  होंगी  इसकी जगह  आप अपनी नयी लाइन  बनाये  .इसके बाद क्या अन्य कार्यवाही होंगी नहीं जानते पर यह सुनिश्चित  हैं की नयी सरकार इसी परिपाटी  को दुहरायेंगी चाहे स्वर्ण  अक्षरों  से लिखे  या स्याही  से लिखे  .
जितनी शक्ति नाम मिटाने  में लगाते  हैं
उससे कम नया नाम लिखने  में लगता हैं
खंडहर के निर्माण में समय अधिक लगता हैं
नव निर्माण में कम समय और उत्तम निर्माण होता हैं
पूरा वतन भरा  पड़ा  हैं ,
कहाँ कहाँ  थीकरा  लगाओगे
इससे बदसूरत इमारत  लगेगीऔर
तुम्हारा नाम भी  गुम  हो जायेगा