नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को दिवंगत जसवंत सिंह को अपना सबसे करीबी सहयोगी और प्रिय मित्र बताया। उन्होंने कहा कि वह ‘उत्कृष्ट सांसद, कुशल राजनयिक, महान प्रशासक और इन सबसे ऊपर एक देशभक्त थे।’ उल्लेखनीय है कि जसवंत सिंह का रविवार को नई दिल्ली में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 82 साल के थे। आडवाणी ने एक बयान में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी नीत सरकार में सिंह ने अकेले और कुशलता से तीन सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों विदेश, रक्षा और विदेश को संभाला।
उन्होंने रेखांकित किया कि राजग सरकार के उन छह वर्षों (वर्ष 1998 से 2004 तक) में कठिन मुद्दों को संभालने के दौरान ‘अटलजी, जसवंत जी और मेरे बीच एक विशेष संबंध बन गया था।’ जसवंत सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए आडवाणी ने कहा कि उनके पास शब्द नहीं है। आडवाणी ने कहा, ‘एक व्यक्ति के तौर पर जसवंत जी एक भद्र पुरुष थे और उन्हें मृदुभाषी, विद्वान और गर्मजोशी वाले व्यक्ति के तौर पर याद किया जाएगा। वह अपने तीक्ष्ण तार्किक दिमाग के लिए जाने जाते थे और पूरे राजनीतिक जगत में सम्मानित व्यक्ति थे।’
उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह भाजपा के कद्दावर नेताओं में से थे और उन्होंने वर्षों तक पार्टी में अपना योगदान दिया। गौरतलब है कि 92 वर्षीय आडवाणी सबसे लंबे समय तक भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले नेता हैं। भाजपा के वयोवृद्ध नेता ने रेखांकित किया कि जसवंत सिंह पुस्तकों से प्रेम करते थे और कहा कि कई बार हम साझा रुचि को लेकर नोट्स की अदला-बदली करते थे। आडवाणी ने कहा, ‘मैं सार्वजनिक जीवन में उनके साथ अपने लंबे जुड़ाव और हमारे परिवारों के बीच के संबंधों को साझा करता हूं। उनका निधन देश और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए बड़ी क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा शांति दें।’ गौरलतब है कि जसवंत सिंह ने अपनी किताब में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा की थी, जिसके बाद वर्ष 2009 में उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था और आडवाणी ने उनकी वापसी में अहम भूमिका निभाई थी।