बिलासपुर ।  उन दिनों जब शहर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या महज एक्का दुक्का ही थी, चारों तरफ अफवाहों का बाजार गर्म था कोरोना का उतना संक्रमण नहीं था तब बिलासपुर नगर निगम के वार्डों में संक्रमण सुरक्षा को लेकर ऐसा फौव्वारेदार सैनिटाइजेशन किया जा रहा था कि मानों घर घर में कोरोना से संक्रमित व्यक्ति हो,आम आदमी निगम की सजगता देखकर ही भयभीत हो जाता..और अब जब बिलासपुर शहर समेत सम्पूर्ण जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है तो सैनिटाइजेशन का ऐसा नजारा कहीं दिखाई नहीं ही नहीं देता नेताओं नें तो लॉक डाउन में घर पर रहने की बजाय कानून तोड़कर अपनी राजनी चमकाने और फोटोबाजी,सेल्फी फोबिया, और ना जाने क्या क्या करके जनता को जताने का प्रयास करते नजर आते और अब जब जनता को वाकई में नेताओं और जनप्रतिनिधियों की शख़्त जरूरत है तो वे स्क्रीन से गायब हैं। अब तो जनता कहने लगी है कि क्या होगा सरकार,कोरोना से जब इतने लोग हो गए बीमार,कहां छुप गए सरकार। मानो या ना मानों कोरोना नें सारे संसार में अपनी धाक जमा ली है अच्छे अच्छे तुर्रमखां भी कोरोना का नाम सुनते ही दुम दबाकर भाग लेते हैं।
वर्तमान के हालात कुछ ऐसे ही है। कोविड-19 महामारी की शुरुआत मार्च के महीने, जब संक्रमण की शुरुआत देश और प्रदेश के शहरों सहित न्यायधानी में हुई उस समय पक्ष और विपक्ष चाहे भाजपा के नेता कह लो या कांग्रेस के नेता सभी नें खूब फोटो खिंचवाई कभी कपड़े का मास्क बांटते हुए तो कभी शासकीय सेनीटाइज मशीनों का पाइप पकड़कर तो कभी गरीबों को राशन बंटाते हुए। दूसरी ओर शासन प्रशासन लोगों से अपील करके कोरोना से निपटने जन सहयोग की अपेक्षा कर रहा था।
बिलासपुर नगर पालिक निगम में भी यहां के पार्षद एवं अन्य नागरिकों ने अपनी अपनी तरफ से जनप्रतिनिधियों ने शासन से मिलने वाली राशि एवं नागरिकों ने स्वयं की स्वेच्छा से शासन को मदद की। सबसे बड़ी बात यह है नौकरी, व्यापार करने वाले उस हर व्यक्ति ने उस दौरान शासन, प्रशासन की जो मदद की थी। कोई अपने महीने की तनख्वाह से,तो किसी नें अपने व्यापार से कमाई जमापूंजी सहयोग में दे दी।
अब जब कोरोना अपने चरम पर लोगों को संक्रमित कर रहा है तो दानदाताओं के मन में सवाल उठ रहे हैं क्या इन नेताओं को फोटो खिंचवाने के लिए इन लोगों ने अपनी जीवन भर की कमाई राशि दी। उस दौरान एक गंभीर मसला सामने आया कि जिन जिन पार्षदों ने अपनी विकास राशि लिख कर दी, उनके वार्ड में राशन, मास्क सैनिटाइजर तय समय अनुसार उपलब्ध कराया गया लेकिन बाकि वार्डों में नहीं कराया गया था।
राजनीतिक मानसिकता से ओतप्रोत बिलासपुर नगर पालिक निगम जिस प्रकार से इस दौर में अपनी जो भूमिका अदा किया है वह अत्यंत सोचनीय विषय है। देश और प्रदेश के नामी गिरामी हस्ती,नेता,समाज सेवक किसी को नहीं छोड़ा इस कमबख्त कोरोना नें रुला कर रख दिया है कमबख्त नें खून के आंसू।
सच तो यह है कि वर्तमान समय में कोरोना के बढ़ते संक्रमण का ना तो कोई वैक्सीन आई है ना ही इससे बचाव के लिए कोई दवा, कोरोना नहीं करता किसी से भेदभाव उसे ना तो गरीब की पहचान है ना अमीर ना किसी जाति से मतलब है ना धर्म से उसे ना तो किसी राजनीतिक दल से मतलब है ना नेता से उसे तो बस संक्रमित करना है यदि बीमार ठीक हो गया तो समझो उसकी तकदीर अच्छी थी, वर्ना कोविड अस्पताल में इलाज के लिए जाना और बच कर निकल जाना मतलब द्विज याने दूसरा जन्म मिल गया। ऐसे विषम परिस्थितियों में नगर पालिक निगम के द्वारा पूरे शहर को सेनीटाइज करने की जरूरत है लेकिन कोई व्यवस्था नही है, अब इनके द्वारा ना तो भोजन का वितरण किया जा रहा है ना सूखा राशन ना ही मास्क का वितरण किया जा रहा है। क्या यह सवाल नहीं खड़े होते कि सिर्फ और सिर्फ दान के ही पैसे से कोरोना से सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी? क्या शासन और प्रशासन ऐसी वैश्विक महामारी में शासन और प्रशासन शासकीय राशि से कोई सुविधा मुहैया नहीं करा सकते। शासन और प्रशासन के लोग सिर्फ जनता के सहयोग राशि से ही जनता का सहयोग करने का दिखावा करेंगे?
नेताओं ने फोटो खिंचाव प्रतियोगिता के माध्यम से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज के लिए, चाहे वह भारतीय जनता पार्टी चाहे वह कांग्रेस चाहे अन्य राजनीतिक दल के हों, अभी वर्तमान हालात में उपजे कठिन परिस्थिति में शासन और प्रशासन के सहयोग की आवश्यकता जनता जनार्दन को है उसका ख्याल कौन रखेगा इनकी मदद कौन करेगा यह भगवान भरोसे ही जान पड़ता है।
इन सब परिस्थितियों में भगवान के कुछ फरिश्ते ऐसे भी हैं जो लोगों की मदद बिना किसी दिखावे और बिना किसी फोटोसूट के करते हैं ऐसा सहयोग की एक हाथ से किया,दूसरे हाथ को पता भी नहीं चलता। नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सोच है कि उनकी दरियादिली सिर्फ शासन प्रशासन के अधिकारियों के बीच बनी रहे और हमें इस मुकाम तक पहुचाने वाली जनता हमको जाने,इतने तक ही सीमित हो गई है। अब मानवता किताबों में सिमट कर रह गई है।