कालभैरव जयंती के दिन पूजा आदि करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति प्राप्त होती है। इतना ही नहीं कालभैरव की पूजा करने से ग्रह बाधा और शत्रु बाधा दोनों से ही मुक्ति मिलती है। भगवान काल भैरव जी की कृपा पाने के लिए और उनकी अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी के दिन से भगवान भैरव की प्रतिमा के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान काल भैरव को काले तिल, उड़द और सरसों का तेल का दीपक अर्पित करना चाहिए साथ ही मंत्रों के जाप के साथ ही उनकी विधिवत पूजा करने से वह प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
इस दिन श्रद्धानुसार साबुत बिल्बपत्रों पर लाल या सफ़ेद चंदन से 'ॐ नमः शिवाय' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।बिल्बपत्र अर्पित करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें। इस तरह पूजा करने से काल भैरव प्रसन्न होकर आपकी मनोकामना पूर्ण करेंगे।
भगवान कालभैरव का वाहन कुत्ता है,इसलिए भैरव की कृपा पाने के लिए इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी अथवा गुड़ के पुए खिलाएं।ऐसा करने से आपके जीवन से कष्टों का निवारण होगा ।
भगवान कालभैरव की उपासना से भूत,प्रेत एवं ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं।सभी नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए इस दिन ॐ कालभैरवाय नम: का जप एवं कालभैरवाष्टक का पाठ करना चाहिए।
भैरव की कृपा पाने के लिए इस दिन किसी भी भैरव मंदिर में गुलाब, चंदन और गुगल की खुशबूदार अगरबत्ती जलाएं। पांच या सात नींबू की माला भैरव जी को चढ़ाएं।गरीब और बेसहारा लोगों को गर्म कपड़े दान करें।
कालाष्टमी व्रत बहुत ही फलदायी मानी जाती है। इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं। काल उससे दूर हो जाता है।
काल भैरव अष्टमी के दिन झूठ बोलने एवं किसी के साथ धोखा करने से बचें ,ऐसा करने से आपको हानि हो सकती है।
गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करना चाहिए। आमतौर पर बटुक भैरव की ही पूजा करनी चाहिए क्योंकि यह इनका सौम्य स्वरुप है।
किसी भी पशु जैसे कुत्ते,गाय आदि के साथ हिंसक व्यवहार भूलकर भी न करें।
कालभैरव की पूजा कभी भी किसी का बुरा होने के लिए न करें,ऐसा करने से भगवान का क्रोध आपको झेलना पड़ सकता है।