अगर आप घर बनवाने जा रहे हैं तो निश्‍चित रूप से वास्‍तु शास्‍त्र (Vastu Tips) के बेसिक नियमों (Vastu Shastra Basic Principles) का ख्‍याल भी रख रहे होंगे. घर के किस दिशा में क्‍या होना चाहिए क्‍या नहीं होना चाहिए, इसका खाका आपने खींच ही लिया होगा या फिर किसी जानकार से राय-मशविरा भी लिए होंगे. घर में बेडरूम, किचन, ड्रॉइंग रूम, पूजा घर, बाथरूम आदि के अलावा बच्‍चों के लिए भी कमरे होंगे. बच्चे का भविष्य (Future of Child) उज्ज्वल देखना चाहते हैं तो आपको उनके लिए आधारभूत सुविधाएं (Basic Infrastructure) भी मुहैया कराने की सोच रहे होंगे. बच्‍चों के कमरे को व्यवस्थित करने की बात भी आपके जेहन में होगी. आइए, आज हम बताते हैं कि वास्तु शास्‍त्र (Vastu Shastra) के अनुसार घर में बच्‍चों के कमरे किस दिशा में होने चाहिए:

बच्‍चों के स्टडी टेबल पर तांबे का पिरामिड या ग्लोब रखें. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
पढ़ाई में मन न लगाने वाले बच्‍चों के कमरे में मोर पंख रखें. जो बच्‍चे पढ़ने में मन लगाते हैं, उनके कमरे में माता सरस्‍वती की फोटो लगाएं.
बच्‍चों के पढ़ने का कमरा शौचालय के पास नहीं होना चाहिए. बच्‍चों के किताबों की रैक या अलमारी पूर्व या उत्तर दिशा में ही रखें.
घर में बच्चों का कमरा पूर्व, उत्तर, पश्चिम या वायव्य (पश्चिम उत्तर दिशा के बीच में) दिशा में होने चाहिए.
बेडरूम में पढ़ाई करनी हो, तो पढ़ने वाली टेबल, लाइब्रेरी रैक पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें. ऐसे में पढ़ते वक्‍त चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में हो.
बच्चे के कमरे का दरवाजा पूरब में हो तो पलंग दक्षिण से उत्तर की ओर होना चाहिए.
बच्‍चों के कमरे से हिंसात्‍मक तस्‍वीरों को जितना दूर रखें, उतना ही बेहतर.
शादी करने योग्य लड़की के लिए वायव्य (पश्चिम उत्तर दिशा के बीच में) का कमरा अति लाभदायक होता है.