वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आपको किसी प्रकार का कर्ज लेना हो तो सबसे पहले यह ध्यान रखें कि मंगलवार को न तो इसके लिए आवेदन करें और न ही कर्ज लें। मंगलवार के दिन लिया गया कर्ज समाप्त होने का नाम नहीं लेता। कई बार तो इसके चक्कर में मुकद्दमेबाजी तक हो जाती है। इसके अलावा अगर वृद्धि नमक योग चल रहा हो अथवा संक्रांति हो तो भी कर्ज नहीं लेना चाहिए। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र में बताए गए अन्य उपाय-

बुधवार के दिन किसी को भी रकम नहीं देनी चाहिए। अन्यथा रकम वापस नहीं आती या अदायगी अत्यंत कठिनाई से प्राप्त होती है।

हस्त नक्षत्र हो या रविवार, तब भी कर्जा नहीं लेना चाहिए। रविवार के दिन यदि अमृतसिद्ध योग बनता हो तो भूल कर भी कर्ज नहीं लेना चाहिए। इन दिनों में कर्ज वापस करना अति शुभ है।
मंगल के दिन एवं तीन मंगल के नक्षत्र में कदापि ऋण नहीं लेना चाहिए।

ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में प्रथम चरण में हो तथा मेष का चंद्रमा हो, द्वितीय चंद्र अनुराधा नक्षत्र में हो तथा चरण चौथा हो तथा लग्न वृश्चिक और वृश्चिक का नवांश हो, तृतीय चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में चौथे चरण में हो एवं वृश्चिक का नवमांश हो तो ऋण बिना किसी विघ्न के समय पर उतर जाता है।

मंगल की दशा एवं अंतरदशा में ऋण लेने से बचना चाहिए।

कर्ज की किश्त शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को देने से कर्जा अतिशीघ्र उतर जाता है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा की ओर जितना अधिक ढलान हो उतनी ही सुख-समृद्धि रहेगी इसलिए नैर्ऋत्य कोण को अधिक ऊंचा कर दें और ईशान कोण का ढलान हटा दें तो कर्ज खत्म हो जाएगा। ईशान कोण में भूमिगत टैंक बनवाने से कर्जा कम होता है। नैर्ऋत्य कोण में ओवरहैड टैंक बनवाएं। उत्तर पूर्व में गोल आईना (दर्पण) लगाएं।

दक्षिण कोण में लाल दरी, कालीन इत्यादि बिछाएं। तिजोरी का मुख उत्तर की ओर करें और घर का मुखिया नैर्ऋत्य कोण में विश्राम करे। नलों में पानी की बर्बादी होने से रोकें। घर को साफ-सुथरा अवश्य रखें, गंदगी कर्ज को जन्म देती है।

अगर निरंतर कर्ज में डूबते जा रहे हों तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी भी पीपल वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह कार्य लगातार 6 शनिवार किया जाए तो चमत्कारी परिणाम मिलता है।

गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए पांच लाल गुलाब के फूल डेढ़ मीटर सफेद कपड़े में बांध दें। फिर इन्हें किसी भी पवित्र नदी गंगा, यमुना, गोदावरी में प्रवाहित कर दें।