कानपुर |  कानपुर के संजीत यादव अपहरण और हत्या मामले ने सूबे में हंगामा मचा दिया है। संजीत यादव की बहन रुची ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि पुलिस कम से कम उनके भाई की डेड बॉडी ही ढूंढ दे। इसी बीच शनिवार को एडीजी बीपी जोगदंड को संजीत के परिजनों और इलाके के लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा। संजीत के घर पहुंचे एडीजी ने जब पुलिस की भूमिका पूछी तो संजीत के पिता चमनलाल फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने बताया कि बेटे का पता नहीं लग रहा था तो वह तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता से मिलने गए थे। उन्होंने ऑफिस से दुत्कार कर भगा दिया था।

चमनलाल ने एडीजी को बताया कि बीच में वह निलंबित गोविन्द नगर सीओ मनोज गुप्ता के पास गए थे। सीओ अपने ऑफिस में मौजूद थे उसके बाद उन्होंने चमनलाल को कहलवाया कि वह बर्रा थाने पहुंच रहे हैं वह भी वहीं पहुंचे। बर्रा थाने में पूर्व इंस्पेक्टर रणजीत राय, सीओ और चमनलाल बैठे। तब इंस्पेक्टर ने उनकी बेटी रुचि पर ही अपहरणकर्ताओं से मिले होने का आरोप लगा दिया था। उसके बाद इंस्पेक्टर ने अपनी डायरी खोली तो उसके पास अपहरणकर्ता का नम्बर था जो कॉल ट्रेसिंग में निकला था।

आपको बता दें कि योगी सरकार ने संजीत यादव हत्याकांड में 11 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। इसमें आईपीएस अपर्णा गुप्ता,डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर रणजीत राय, दो दारोगा राजेश और योगेंद्र प्रताप सिंह सहित छह सिपाही अवधेश, दिशु भारती, विनोद कुमार, सौरभ पांडे, मनीष और शिवप्रसाद को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। 

सात घंटे की तलाश के बाद भी नहीं मिला संजीत का शव
संजीत के शव की तलाश में शनिवार को पांडु नदी में सात घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया पर शाम साढ़े सात बजे तक कोई कामयाबी नहीं मिली। अंधेरा होने के कारण ऑपरेशन बंद कर दिया गया। अगुवाई कर रहे बिधनू थाना प्रभारी ने बताया कि फतेहपुर से फ्लड कंपनी बटालियन के 35 गोताखोर और छह बोट और मंगवाई गई हैं। दो बोट से घटनास्थल फत्तेपुर गोही लोहे के पुल से चार बजे उरियारा निर्माणाधीन पुल तक तलाश की गई।