छिंदवाड़ा। मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री कमलनाथ ने उपचुनावों में करारी हार झेलने के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्‍होंने छिंदवाड़ा के सौसर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राजनीति छोड़ने के संकेत दिए हैं। कमलनाथ ने कहा कि अब मैं आराम करना चाहता हूं, मुझे किसी भी पद की कोई महत्वाकांक्षा और लालच नहीं है, मैंने काफी कुछ हासिल किया है। मैं घर पर रहने के लिए तैयार हूं। हालांकि कमलनाथ के इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी मैदान में आ गई। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि कमलनाथ के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। साथ ही उन्‍होंने दावा किया कि 2023 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी कमलनाथ के नेतृत्व में ही लड़ेगी। जबकि कमलनाथ के मीडिया कोऑर्डिनेटर नरेंद्र सलूजा ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि कमलनाथ ने छिंदवाड़ा की जनता से कहा कि जिस दिन जनता चाहेगी, उस दिन ही संन्यास ले लूंगा। कमलनाथ के इतना कहते ही छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ के पक्ष में जोरदार नारेबाजी कर कहा कि हम आपको एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। नरेंद्र सलूजा ने सफाई देते हुए कहा की कमलनाथ राजनीति में रहते हुए जन सेवा का कार्य जारी रखेंगे।
  मध्‍य प्रदेश उपचुनाव में 28 सीटों में से सिर्फ 9 पर जीत हासिल करने के कारण कमलनाथ के खिलाफ राज्‍य में आवाज उठ रही हैं। हालांकि छिंदवाड़ा में जनसभा में दिए उनके बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री इन दिनों अपने बेटे के साथ छिंदवाड़ा के दौरे पर हैं, जो कि कमलनाथ और कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। फिलहाल कमलनाथ मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता होने के साथ-साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इसी साल मार्च में ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कमलनाथ ने सत्‍ता गंवा दी थी और फिर मध्‍य प्रदेश में 28 सीटों पर हुए उपचुनाव में उनके दावे की हवा निकल गई। इस उपचुनाव में कमलनाथ ने दावा किया था कि शिवराज सरकार को जनता करारा जवाब देगी और कांग्रेस की एक बार फिर सत्‍ता में वापसी होगी। हालांकि वह सिर्फ 9 सीट ही जीत सकी। कुल मिलाकर कमलनाथ के राजनीतिक संन्यास को लेकर दिनभर चर्चा का माहौल गर्म है। 73 साल के हो चुके कमलनाथ कब तक राजनीति में रहेंगे। यह कमलनाथ को ही तय करना है, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव, 2020 में 28 विधानसभा सीट के उपचुनाव में रणनीति के जरिए बीजेपी को मुश्किलों में डालने वाले कमलनाथ नगरी निकाय चुनाव पर फोकस कर रहे हैं। ऐसे में यदि कमलनाथ के राजनीतिक संन्यास लेने की खबर सच होती है तो यह बीजेपी के लिए अच्छी खबर होगी। कमलनाथ के बयान को लेकर बीजेपी ने भी तंज कसा है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने कहा है कि यदि कमलनाथ समय रहते हुए संन्यास ले लेते तो मध्य प्रदेश इतना पीछे नहीं जाता।