नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  (Donald Trump Administration) ने अमेरिका आकर नौकरी करने वालों पर सख्ती के लिए वीजा नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. मंगलवार को विदेशों से कुशल श्रमिकों को जारी वीजा (Visa) के प्रोसेस को लिमिट करने की योजना बनाई है. अधिकारियों ने कहा कि इस योजना को प्राथमिकता देने की वजह कोरोनोवायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के कारण नौकरियों के हो रहे नुकसान को बताया है. आपको बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  ने जुलाई में एच -1 बी कार्यक्रम को अस्थायी रूप से निलंबित करते हुए वर्ष के अंत तक एक आदेश जारी किया था.

Cuccinelli और श्रम सचिव के उप सचिव पैट्रिक पिज़ेला ने कंपनियों कि आलोचना करते हुए कहा कि H1B वीजा के माध्यम से कंपनियां सस्ते में लोगों को विदेशों से हायर कर लेती हैं जिससे अमेरिका में रहने वालों को नौकरी नहीं मिल पाती है.

होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट और श्रम अधिकारियों के विभाग ने कहा कि  एच -1 बी वीजा प्राप्त करने वाले नए नियम क्या हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जाना चाहिए, इसके लिए जल्द ही एच -1 बी वीजा (H-1 B Visa) कार्यक्रम रखा जाएगा. कार्यवाहक उप सचिव केन क्यूकेनेली ने कहा कि डीएचएस का अनुमान है कि लगभग एक तिहाई एच -1 बी आवेदकों को नए नियमों के तहत वंचित रखा जाएगा.


अमेरिकी श्रमिकों को अच्छे भुगतान, मध्यम वर्ग की नौकरियों से बेदखल किया जा रहा है और गैर-अमेरिकी श्रमिकों के साथ बदल दिया गया है. इसने कुछ मामलों में अमेरिकी मजदूरी को स्थिर करने का कारण भी बनाया है. यह गलत है.

H-1B कार्यक्रम राष्ट्रपति जॉर्ज H.W के तहत बनाया गया था. बुश ने कंपनियों को विशेष नौकरियों को भरने में मदद करने के लिए तकनीकी क्षेत्र में योग्य श्रमिकों को ढूंढने के लिए ये प्रोग्राम शुरू किया था. कई कंपनियां जोर देकर कहती हैं कि उन्हें अभी भी महत्वपूर्ण पदों को भरने के लिए H-1B कार्यक्रम की आवश्यकता है.