फेसबुक के संदेशों के एंड टू एंड एन्क्रिप्शन के खिलाफ ब्रिटेन के नेतृत्व वाले अभियान में अब भारत भी शामिल हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान पहले से ही इस अभियान का हिस्सा हैं। सातों देशों ने संयुक्त रूप से सभी तकनीकी कंपनियों को संबोधित किया है कि वे सोशल मीडिया पर होने वालीं अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज करें।

ब्रिटेन की गृह सचिव प्रीति पटेल ने रविवार को जारी बयान के हवाले से कहा, हम यौन अपराधियों और ऑनलाइन अपराधियों को पकड़ने में मदद करने के लिए अपने नागरिकों को श्रेय देते हैं। यह आवश्यक है कि टेक कंपनियां इस समस्या से मुंह मोड़ें। उनके सहयोग से ही इन ऑनलाइन आपराधिक कृत्यों से आसानी से निपटा जा सकेगा। हमारे देश ने सभी तकनीकी कंपनियों से आग्रह किया कि वे हमारे साथ मिलकर काम करें ताकि ऐसा समाधान निकाला जा सके, जिसकी पहली प्राथमिकता जनता की सुरक्षा हो।

दुनियाभर में फेसबुक के उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि सोशल मीडिया दिग्गज द्वारा नियोजित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन संदेश सार्वजनिक सुरक्षा में बाधित हैं। सात देशों द्वारा दिए गए बयान में यह स्पष्ट किया है कि एंड टू एंड एन्क्रिप्शन की व्यवस्था में इन संदेशों को सिर्फ भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही देख सकता है।

देशों ने चिंता जताई कि इससे उनके लोगों की जानकारी का इस्तेमाल आतंकवादियों द्वारा किए जाने और बच्चों की अश्लील तस्वीरों के प्रसार को रोकने की स्थिति में उनका कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। इसलिए फेसबुक को जरूरत पड़ने पर इंक्रिप्टेड संदेशों तक इन देशों को पहुंच देनी चाहिए। संयुक्त बयान में कहा गया है कि निजता बेहद जरूरी है लेकिन डाटा सुरक्षा के साथ साथ कानून की प्रक्रिया भी जरूरी है। जवाब में, फेसबुक ने कहा कि लंबे समय से उसकी ओर से यही तर्क दिया जा रहा कि लोगों की सबसे निजी जानकारी की सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बहुत आवश्यक है।