लाहौर । पैंडोरा पेपर्स लीक होते ही पाकिस्तानी राजनीति में भूचाल आ गया है। दुनियाभर में अमीर व्यक्तियों की वित्तीय संपत्तियों का खुलासा करने वाले ‘पैंडोरा पेपर्स' में गोपनीय दस्तावेजों से पता चलता है कि कैसे इसतरह के लोग कर बचाने के वास्ते अपने धन को छुपाने के तरीके इस्तेमाल करते हैं। लगभग एक करोड़ 20 लाख दस्तावेजों को मिलाकर तैयार की गई रिपोर्ट को ‘इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने जारी किया जो दुनियाभर के मीडिया संगठनों के साथ काम करती है। विश्व के नेताओं, पूर्व राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की संपत्तियों के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ, पैंडोरा पेपर्स से पता चलता है कि कैसे कम कर दरों वाले कई देशों में कर से बचने के लिए धन छिपाया जाता है। इस लिस्ट में इमरान सरकार के कई मंत्रियों के परिवार के सदस्यों, जल संसाधन मंत्री मूनिस इलाही, उद्योग मंत्री खुसरो बख्तियार, वित्त मंत्री शौकत तारिन और सांसद फैसल वावड़ा के अलावा लिस्ट में सेना के अधिकारियों सहित 700 पाकिस्तानियों के नाम शामिल हैं। खुलासे के बाद पाकिस्तान के विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज ने पैंडोरा लीक के बाद सरकार से इस्तीफा मांगा है।
पार्टी ने कहा कि इमरान का नाम भी पैंडोरा पेपर्स लीक में हो सकता है,इसके पहले तोशखाना केस में भी उनका नाम आया था,इसकारण इमरान को अपने पद से फौरन इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि रिपोर्ट सामने आने के बाद पीएम इमरान ने सफाई देकर कहा है कि लिस्ट में जिन लोगों का नाम सामने आया है, उनकी जांच होगी। दोषियों के खिलाफ कड़ा एक्शन होगा। इमरान ने इंटरनेशनल कम्युनिटी से इस मसले को जलवायु परिवर्तन की तरह गंभीरता से लेने की अपील की है। इसके पहले 2016 में इस संगठन ने पनामा पेपर्स लीक किए थे। तब दुनिया को पता लगा था कि पनामा जैसे टैक्स हेवन्स देशों में अमीर लोग किस तरह अपनी काली कमाई इन्वेस्ट करते हैं। अब पनामा को ही लेकर पैंडोरा पेपर्स जांच के दस्तावेज सामने आने लगे हैं।