चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इशारों-इशारों में बड़ा खुलासा कर दिया है। वहीं कैप्टन अब कुछ उग्र भी नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, जिसके रणनीतिकार प्रशांत किशोर होंगे। पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू से प्रशांत किशोर की मुलाकात को खारिज करते हुए कैप्टन ने साफ किया है कि पीके उनके पारिवारिक मित्र हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि सिद्धू को कोई परेशानी है तो सीधे मुझसे बात करे।
लॉकडाउन से पहले उनकी पीके से मुलाकात भी हुई थी। उन्होंने उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का रणनीतिकार बनने के लिए न्योता दिया था। इसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया है। बाद में जब उन्होंने आलाकमान से बात की तो उन्होंने सारे फैसले मुझ पर छोड़ दिए। यही नहीं, नवजोत सिद्धू के बरगाड़ी कांड को लेकर दिए गए बयान पर कैप्टन ने कहा कि सिद्धू को दिक्कत है तो वह मुझसे बात करें। मैं धक्केशाही में विश्वास नहीं रखता, कानून के तहत काम करना पसंद करता हूं।
पिछले कई महीनों से कैप्टन और सिद्धू में अप्रत्यक्ष तौर पर जुबानी जंग चल रही है। मामला आलाकमान तक पहुंच चुका है। चर्चा यह भी है कि सिद्धू को सरकार में डिप्टी सीएम बनाने के लिए प्रियंका गांधी पैरवी कर रही हैं। लेकिन आज के बयान से यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में भी कैप्टन अपनी ही चलाएंगे। हरियाणा में आलाकमान को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने झुकना पड़ रहा है। ऐसे में कैप्टन के सामने झुकना आलाकमान की मजबूरी है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में उन्होंने ही पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन को शिकस्त दी थी।
कैप्टन के इस बयान से सबसे बड़ा झटका उन नेताओं को लगेगा, जो इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का सिरमौर बनना चाह रहे हैं। सिद्धू उनमें से प्रथम पंक्ति के नेता हैं। इसके बाद नंबर वित्त मंत्री मनप्रीत बादल का आता है। उसके बाद यह लाइन लंबी है। मालूम हो कि कैप्टन ने शुरुआत में यह बयान दिया था कि वे अब चुनाव नहीं लड़ना चाहते, लेकिन उनके आज के बयान से हलचल तेज हो गई है। पंजाब में शीघ्र ही मंत्रिमंडल का विस्तार होना है। ऐसे में कैप्टन ने यह भी साफ कर दिया है कि इस विस्तार में भी उनकी ही चलेगी। इस समय सिद्धू को महत्वपूर्ण पद दिए जाने को लेकर प्रियंका गांधी का कैप्टन सरकार पर दबाव है। प्रियंका यह चाहती हैं कि सिद्धू को डिप्टी सीएम जैसा कोई महत्वपूर्ण पद दिया जाए। अब मंत्रिमंडल विस्तार में क्या होगा, यह देखने का विषय है।