क्या पाया गया रिसर्च में?
एक रिसर्च के अनुसार घर में कुत्ता पालने से बच्चों की सामाजिक और भावनात्मक परेशानियां लगभग 23 प्रतिशत कम होती हैं। असल में कुत्ता पालने से बच्चे उसके साथ समय बिताना पसंद करते हैं। वे उसके साथ घूमते और खेलते हैं। इसतरह उन्हें  अंदर से खुशी मिलती है। वे जिंदगी को अच्छे से जीना सीखते है। 

व्यवहार में बदलाव
वैज्ञानिकों द्वारा 1700 घरों के 2 से 5 साल के बच्चों के बारे में जानकारी हासिल की गई। ऐसे में शोधकर्ताएं इस निर्णय पर पहुंचे कि जिन घरों में कुत्ते पाले गए। उन घरों के बच्चों को असामाजिक व्यवहार में खुद को समायोजन करने के लिए 30 प्रतिशत तक कम संघर्ष करना पड़ा। इसके विपरीत बाकी के बच्चों को समाज में रहने के लिए लगभग 34 प्रतिशत संघर्ष करना पड़ता हैं।

मानसिक और सामाजिक विकास
इसके अलावा कुत्ते के साथ समय बीताने से बच्चों का मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर ढंग से होता है। ऐसे में उनका कुत्तों लगाव होने लगता है। इसतरह बच्चे अपनेपन की भावना सीखते है। वे भावनात्मकतौर भी अपनी फैमिली के साथ जुड़ते है। 

तनाव करें कम
कुत्ते के साथ खेलकर बच्चे खुशी का अहसास करते है। इसतरह वे मानसिक रूप से शांत व सही रहते है। साथ ही  सिजोफ्रेनिया जो दिमाग की एक बीमारी है। उसकी चपेट में आने से बचे रहते है। सन् 2019  में हुए एक शोध के अनुसार एक्पर्ट्स ने बताया कि बच्चों को बचपन में ही बहुत से मेंटल डिसऑडर्स का सामना करना पड़ता हैं। असल में बचपन वे जिस माहौल में रहते हैं। उससे उनके दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बच्चे पालतु जानवरों के साथ ज्यादा खुशी महसूस करते है। इससे उनके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित होने में मदद मिलती हैं। इसतरह घर में पेट्स होने से बच्चों का उनके साथ खास लगाव होने लगता है। साथ ही कुत्ते के साथ उनका संबंध और जुड़ाव उनको मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करता है। 

इन चीजों का रखें खास ध्यान
कोरोना के कहर से बचने के लिए सभी को घर पर रहने की ही सलाह दी गई है। खासतौर पर तो बच्चों को घर बाहर जाने के लिए मना है। ऐसे में जिन घरों में पालतु कुत्ते उनका बच्चों के साथ और भी खास और गहरा रिश्ता बन रहा है। मगर कोरोना से बचने के लिए पेरेंट्स को बच्चों के साथ अपने पालतु कुत्ते की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।