नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में किसी कोविड-19 मरीज को छूना भी खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में डॉक्टर और नर्सों के लिए काम करना चुनौती है। खासकर उन डॉक्टरों के लिए जिन्हें भारी भरकम किट पहनने से थोड़ी ही देर के बाद बेचैन होने लगती है। इन सब परेशानियों को दूर करने के लिए अपने देश में भी मानव रोबोट ने काम करना शुरू कर दिया है। इसी साल अप्रैल में सबसे पहले नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इस रोबोट के काम को परखा गया और अब देश के कई निजी अस्पतालों में यह रोबोट काम करने लगे हैं और साफ-सफाई से लेकर मरीजों की स्कैनिंग करने का काम भी ये रोबोट कर रहे हैं।
80 हजार से 12 लाख तक कीमत
यह रोबोट अस्पताल की साफ सफाई करता है, और घास को भी काटता है। इस रोबोट को लोगों के स्वागत सत्कार के उद्येश्य से बनाया गया है। यह टेलीमेडिसीन, रिमोट कंसलटिंग, कांफ्रेंस और सर्विलांस में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कमियों की मदद करता है। सामान्य रोबोट की कीमत 80 हजार से 12 लाख रुपये के बीच है लेकिन अस्पताल में काम करने वाले रोबोट की कीमत 6.5 लाख से शुरू होती है। अस्पताल में यह रोबोट फर्श साफ करता है और सभी जगहों को सोडियम हाइड्रोक्लोराइड से साफ करता है। अल्ट्रावायलट लाइट की मदद से यह अस्पताल में संवेदनशील जगहों को डिसइंफंक्ट करता है। एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि कोरोना काल के इस दौर में हम बेहद चुनौती से गुजर रहे हैं। मरीजों से सैंपल कलेक्ट करना हमारे लिए महत्वपूर्ण है और इस काम में रोबोट हमारा सहायक बन सकता है। रोबोट अस्पताल में कोविड-19 लक्षण वाले लोगों का स्कैन करता है। उसका तापमान मापता है और उसके चेहरे के हाव-भाव से बीमारी की आशंका की पहचान करता है। अगर मरीज डॉक्टर से बात करना चाहता है तो रोबोट वीडियो कॉलिंग के माध्यम से डॉक्टर से बात भी कराता है।
चलते हुए किसी से नहीं टकराता
यह रोबोट 2.9 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इधर से उधर कर सकता है। यानी जिस तरह इंसान की रफ्तार होती है, उसी तरह यह भी चलता है। चलते हुए भी यह सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इसमें इंनब्यूल्ट थ्री डाइमेंशनल डाटा और हाई डेफनिशन कैमरे लगे होते हैं। यह रोबोट अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों से 10 इंच की स्क्रीन पर बात भी कराता है। यह रोबोट लाइट डिटेक्शन एंड रैंजिंग (एलआईडीएआर) और सिमुलटेनियस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग (एसएएलएम) तकनीक पर आधारित है। इसमें 60 सेंसर लगे होते हैं जिससे यह किसी संकरी जगह पर चलते हुए भी किसी वस्तु या लोगों से नहीं टकराता । इस रोबोट को मिलाग्रो रोबोटिक्स ने बनाया है। यह चार घंटे में फुल चार्ज होता है और एक चार्ज में 12 घंटे तक काम करता है।