ग्वालियर। मप्र में 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस को पूरा फोकस ग्वालियर-चंबल अंचल की 16 सीटों पर है। जिसके कारण ग्वालियर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनें 100 से अधिक समय हो गया है। भाजपा के सूत्रधार सीएम शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अब तक ग्वालियर नहीं गए हैं। भाजपा के ये सूत्रधार भोपाल व दिल्ली में उलझी हुए है। शिवराज सरकार में दूसरे नंबर को रूतबा रखने वाले गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ही अंचल में किला लड़ा रहे हैं। प्रदेश भाजपा के दूसरी पंक्ति के नेता गौरीशंकर बिसेन व जयंत मलैया अवश्य दो बार ग्वालियर में कैंप कर चुके हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा भी अंचल के हैं, लेकिन अब तक वह नहीं गए हैं। जिसके कारण कार्यकर्ताओं में बैचेनी भी है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार का भविष्य उपचुनाव पर टिका हुआ है। कांग्रेस भी भोपाल में वापसी के लिए पूरा जोर ग्वालियर-चंबल अंचल में लगा रही है। आंतरिक रूप से भाजपा चुनाव के होमवर्क में कांग्रेस से काफी आगे हैं। भाजपा के प्रत्याशी भी लगभग घोषित से ही है। संभावित उम्मीदवार चुनावी रण में उतर भी चुके हैं। लेकिन भाजपा चुनाव के सूत्रधार सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर अंचल में जाने का वक्त नहीं निकल पाए हैं। कोरोना संकट काल में नरेंद्र सिंह तोमर एक बार अवश्य अपने संसदीय क्षेत्र में जा चुके हैं।


सिंधिया समर्थक भी हैं बेचने
कांग्रेस छोडऩे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद कमलनाथ सरकार भी धरशायी हो गई। बदले हुए समीकरणों में सिंधिया भी राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार भी हो गया। सरकार बनने की 100 दिन की अवधि में तीन बार सिंधिया का भोपाल का दौरा हो चुका है। लेकिन अब तक सिंधिया अपने गृहनगर नहीं गए हैं। समर्थक भी कांग्रेस छोडऩे के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के लिए सिंधिया के नगरागमन का इंतजार कर रहे हैं। यह लोग अभी भाजपा कार्यालय की सीढिय़ां चढऩे से हिचक रहे हैं। इसलिए सिंधिया समर्थकों में बैचेनी है।


नरेंद्र सिंह का भी हो रहा है इंतजार
पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी अंचल की राजनीति का केंद्र हैं। उपचुनाव की गतिविधियां भी शुरू हो गईं हैं। लेकिन नरेंद्र सिंह अभी दिल्ली व भोपाल में ही उलझे हैं। नरेंद्र सिंह जुड़े लोग भी चुनाव की दिशा तय नही कर पा रहे हैं। स्थानीय भाजपा नेता भी कोरोना संक्रमण के कारण नरेंद्र सिंह मिलने के लिए दिल्ली नहीं जा पा रहे हैं। भाजपा में भी नरेंद्र सिंह तोमर का आने का इंतजार किया जा रहा है। नरेंद्र सिंह के आगमन के बाद चुनाव की गतिविधियां बढऩे की उम्मीद हैं।


सीएम भी दिल्ली-भोपाल में अटके
चौथी बार प्रदेश सरकार के मुखिया बनने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल के गठन से लेकर विभागों के बंटवारे के लिए दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के कारण भोपाल में उनकी व्यवस्ता हैं। शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी भी कार्यकर्ताओं व नेताओं को प्रोत्साहित करती है। अंचल में उपचुनाव की गतिविधियों के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को सीएम के नगर आगमन का इंतजार है। हालांकि संभावित उम्मीदवारों से सीएम सीधा संवाद कर चुके हैं। और अंचल की कई महत्वकांक्षी योजनाएं को हरीझंड़ी दे चुके हैं।

कांग्रेस ने 24 विधानसभाओं को 4 सेक्टरों में बांटा
उधर कांग्रेस भी तैयारी में जुटी हुई है। कांग्रेस ने गतदिनों 24 विधानसभाओं को लेकर भोपाल में एक बड़ी बैठक की। बैठक में जिन विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होने वाले हैं, वहां के सभी जिलों के शहर और ग्रामीण क्षेत्र के अध्यक्षों को बुलाया गया था। 24 विधानसभाओं को 4 सेक्टरों में बांटकर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। इसके पहले कांग्रेस की ओर से सभी विधानसभाओं में पूर्व मंत्रियों और प्रभावशाली विधायकों को प्रभारी के रूप में जवाबदारी दे दी गई है।  यही नहीं, इन सेक्टरों के हिसाब से कमलनाथ और अन्य बड़े नेताओं के दौरे तय किए जा रहे हैं। सबसे पहला दौरा ग्वालियर-चंबल संभाग का रखा गया है, जहां सबसे ज्यादा विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है और ये सभी सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाली हैं। यहां 13 जुलाई से प्रचार शुरू हो रहा है।