जयपुर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री निवास से प्रदेश में चांदी के खनिज भण्डारों की खोज और उत्पादन के विषय में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान की धरती में मौजूद बहुमूल्य खनिज संपदा का वैज्ञानिक तरीकों से दोहन कर प्रदेश के विकास को अधिक गति देने के लिए राज्य सरकार हमेशा प्रयासरत है। साथ ही, विभिन्न खनिज भण्डारों की खोज एवं खनन कार्यों में आधुनिकतम तकनीक के उपयोग, अनुसंधान तथा स्थानीय निवासियों को इन कार्यों के लिए रोजगार के योग्य बनाने के लिए कौशल विकास पर भी फोकस किया जा रहा है। 
उन्होंने कहा कि खनिजों की खोज में तकनीक, रिसर्च, कौशल विकास एवं राजस्व बढ़ोतरी के उद्देश्य से खनन गतिविधियों के बेहतर संचालन एवं मॉनिटरिंग के लिए बीते दिनों राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का गठन किया गया है। कुछ वर्ष पहले राजस्थान में हुई तेल और प्राकृतिक गैस की खोज के बाद अब यदि चांदी के खनिज का खनन शुरू होता है, तो प्रदेश विकास के रास्ते पर तेज गति से आगे बढ़ सकेगा। मुख्यमंत्री ने ‘चांदी भारत का सांस्कृतिक गौरव तथा अद्वितीय अवसरों की राह’ शीर्षक में आयोजित वेबीनार में मौजूद खनन कम्पनियों के प्रबन्धकों और निवेशकों को राजस्थान में व्यवसायिक संभावनाओं के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि उदयपुर एवं राजसमंद जिलों में देश के 87 प्रतिशत चांदी के भण्डार हैं। इसके साथ-साथ राजस्थान में पोटाश, जिंक, पेट्रोलियम, कॉपर, जिप्सम, लाइमस्टोन आदि खनिजों के भी विशाल भण्डार मौजूद हैं, जिनके खनन कार्यों में निवेश के अपार अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में काम करने के लिए निवेशकों को राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ पूरा सहयोग देने को तैयार हैै।  गहलोत ने कहा है कि राजस्थान अब केवल एक मरूस्थलीय राज्य नहीं रहा है। यहां अब हरियाली है, बड़े उद्योग हैं, नया निवेश आ रहा है तथा आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी और एम्स जैसे संस्थान स्थापित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में कौशल विकास के लिए एक विश्वविद्यालय भी खुला है, जिसके माध्यम से विभिन्न जिलों में युवाओं को नये उद्योगों में काम करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने इस काम में उद्योगपतियों और निवेशकों को आगे आकर प्रशिक्षण तथा कौशल विकास खोलने को कहा, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को आवश्यकता के अनुरूप कुशल कार्मिकों के रूप में तैयार किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेम्स-ज्वैलरी सेक्टर में प्रदेश का पूरी दुनिया में बड़ा नाम है। यहां से आभूषणों की कारीगरी के बाद उनके निर्यात का बड़ा कारोबार होता है। यदि राजस्थान के खनिज भण्डारों से चांदी का खनन और उत्पादन होने लगे तो आभूषण निर्यात उद्योग का और अधिक विस्तार संभव है। उन्होंने इसके लिए आभूषण कारीगरों के कौशल विकास और उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के डिजाइन तथा उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करने के काम में उद्यमियों की भागीदारी पर जोर दिया।