• विभिन्न विषयों का अध्ययन के बाद भारत में कार्य करने में मिलेगी मदद : मेहता
  • 25 साल की उम्र में बचपन के सपने को पूरा किया

गोहाना के आकाश ने वर्ल्ड बैंक में नियुक्ति पाने का इतिहास रचा है। उन्होंने 25 साल की उम्र में बचपन के सपने का पूरा किया है। उनकी नियुक्ति एनवायरमेंट एनालिस्ट के तौर पर हुई हैं। फिलहाल आकाश मेहता फिलहाल कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में कोविड-19 के डाटा पर रिसर्च कर रहे हैं। नई नियुक्ति पर आकाश मेहता और उनके परिवार के सदस्य खुशी जताई है। आकाश मेहता का कहना है कि नई जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभाने के लिए विभिन्न देशों के पर्यावरण का अध्ययन करेंगे।

आकाश मेहता के पिता सुनील मेहता व्यवसायी है। मेहता के अनुसार परिवार का पहला सदस्य इतने ऊंचे पद पर पहुंचा है। यह आकाश की अपनी मेहनत है। बचपन से ही वर्ल्ड बैंक में कार्य करना चाहता था। इसलिए इंजीनियरिंग की बजाए श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली में दाखिला लिया और वहां से इकोनॉमिक्स में ऑनर्स की। इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी पढ़ाई की। दो साल तक सरकारी सेवाएं भी दी। पिछले वर्ष रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुम्बई कार्यालय में रिसर्च एनालिस्ट के रूप में कार्य किया। वर्ल्ड बैंक की सचिव क्रेग हैमर ने इंटर्नशिप के लिए चयन किया था। इस दौरान आकाश ने अच्छा प्रदर्शन किया। अब उनकी नियुक्ति वर्ल्ड बैंक में हुई हैं। वह इस माह के अंत तक ज्वाइन करेंगे।

विभिन्न विषयों का अध्ययन के बाद भारत में कार्य करने में मिलेगी मदद : मेहता
आकाश मेहता का कहना है कि अब वे कोरोना-19 पर रिसर्च कर रहे हैं। वर्ल्ड बैंक में विभिन्न देशों के पर्यावरण पर अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। कार्य करने के दौरान वहां की व्यवस्था समझने का भी अवसर मिलेगा। इससे भारत में लौटने पर वहां की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए कार्य करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उनके पिता सुनील मेहता और मां नीलम मेहता हमेशा लोगों की मदद की है। जो शिक्षा उन्होंने दी है, उस पर चलते हुए लोगों की मदद करना ही उनका लक्ष्य रहेगा।

लक्ष्य बड़ा रखे, छोटा लक्ष्य रखकर बड़ा नहीं बन सकते
आकाश मेहता ने युवाओं को संदेश दिया है कि लक्ष्य बड़ा रखे। लक्ष्य प्राप्त करने में समय लग सकता है। संयम रखते हुए निरंतर प्रयास करते रहें, निश्चित रूप से लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, यदि लक्ष्य छोटा निर्धारित करेंगे तो बड़ा नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि बचपन में ही वर्ल्ड बैंक के बारे में सुना था। वहां पहुंचने का लक्ष्य रखा।