जयपुर. उत्तर प्रदेश सूबे के कुख्यात अपराधी विकास दुबे (Vikas Dubey) के आज एनकाउंटर में मारे जाने की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है. ठीक ऐसी ही गूंज करीब तीन वर्ष पहले राजस्थान के कुख्यात हिस्ट्रीशीटर आनंदपाल के एनकाउंटर (Anandpal's encounter) के समय सुनाई दी थी. गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर से पूरा राजस्थान हिल उठा था और राजनीति में उबाल आ गया था. आनंदपाल एनकाउंटर केस की सीबीआई जांच को लेकर प्रदेश में बड़ा आंदोलन हुआ था. आनंदपाल एनकाउंटर से पुलिस ने जितनी राहत महसूस की थी उतनी ही उसकी मुश्किलें भी बढ़ गई थी.
आनंदपाल एनकांउटर के बाद उसके गृहक्षेत्र नागौर के सांवराद में हुए दंगों की जांच कर रही सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में अदालत में चार्जशीट पेश की है. जोधपुर में सीबीआई मामलों की अदालत एसीजेएम कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में सांवराद दंगों को लेकर 24 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है. अब इस चार्जशीट को लेकर एक बार फिर यह मामला गरमा गया है. हाल ही में राज्य सरकार के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि आंनदपाल मुठभेड़ की सीबीआई जांच सवालों के घेरे में है. खाचरियावास ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है, सीबीआई ने न्याय मांगने वालों को ही आरोपी बना दिया है.

दहशत का दूसरा नाम था आनंदपाल
राजस्थान में दहशत का दूसरा नाम बन चुके गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का जन्म नागौर के लाडनूं तहसील के गांव सांवराद में हुआ था. जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही आनंदपाल अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया था. बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर अपराध करना आनंदपाल का शौक रहा था. वह खतरनाक हथियारों पर के बल पर अपराध जगत का बेताज बादशाह बनने की कोशिश कर रहा था. आनंदपाल के खिलाफ लूट, डकैती और हत्या सहित दो दर्जन से भी ज्यादा मामले दर्ज थे. पूरी प्रदेश की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके आनंदपाल का 24 जून 2017 की रात चूरू जिले के रतनगढ़ इलाके में एनकाउंटर कर दिया गया था. उस समय वह फरारी काट रहा था और एक मकान में छिपा हुआ था.