बिलासपुर । गणेश चतुर्थी आने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। लोगों में गणेश चतुर्थी के लिए विशेष उत्साह देखने को मिलता है। गणेश जी बुद्धि के देवता हैं । रतनपुर नगर के हर गली मोहल्लों में उनकी मूर्तियों की स्थापना और पूजा की जाती है। इस कारण नगर में कई स्थानों पर मूर्तिकार गणेश जी की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। जिससे कि गणेशोत्सव तक गणेश जी की प्रतिमाओं को पूर्ण किया जा सके। मूर्तिकारों का कहना है कि लाक डाउन के चलते इस वर्ष मूर्ति निर्माण के लिए प्रयुक्त होने वाले कपड़ों, मिट्टी और रंगों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। जिसके कारण इस वर्ष मूर्तियों की कीमतें भी पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ जाएगी।
मूर्तिकार बसंत चित्रकार का कहना है कि उनके पूर्वज उड़ीसा के रहने वाले हैं जो कि महामाया की धार्मिक नगरी रतनपुर में आकर मूर्ति बनाकर बेचने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे पूरे परिवार सहित यहीं निवास करने लगे उसने अपने माता-पिता से मूर्ति बनाने का काम सीखा है। जो कि अपने घर में ही रहकर परिवार समेत मूर्तियों का निर्माण कर रहे हैं। प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी उनके द्वारा 2 माह पूर्व से ही मूर्तियों का निर्माण शुरू कर दिया गया है। रतनपुर में उनकी काफी जान पहचान बढ़ गई है। गणेशजी की मूर्तियों के निर्माण के आर्डर पहले से ही मिल जाते थे। जोकि छोटी मूर्तियों से लेकर 06 से 08 फीट ऊंची मूर्तियों तक का निर्माण करते थे। उनकी बनाई मूर्तियां रतनपुर के साथ आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी बहुत पसंद की जाती है और उन्हें बड़े पैमाने पर आर्डर मिलते हैं। बचपन से ही वह मूर्ति निर्माण में लगे हुए हैं। वह गणेश जी के अलावा दुर्गा जी और विश्वकर्मा जी,सरस्वती मां,काली मां की मूर्तियों का भी निर्माण करते हैं। गणेशोत्सव के बाद विश्वकर्मा पूजा और दुर्गा पूजा की तैयारी में वे लग जाएंगे। लेकिन इस बार उन्हें मूर्तियों का आर्डर काफी कम मिला है। उनके द्वारा तीन से साढ़े तीन फिट की मूर्तियां बनाया गया है जिसमें से मात्र अभी तक 05 मूर्तियों का ऑर्डर उन्हें मिल पाया है। जिससे वे परिवार के पालन पोषण को लेकर काफी चिंतित हैं।