• शुक्रवार को मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर, नहर के गणेश जी मंदिर, परकोटे वाले गणेश जी मंदिर सहित अन्य गणेश जी मंदिरों में सिंजारा मनाया गया
  • शनिवार को सभी मंदिरों में गणेश चतुर्थी के विशेष पूजन के श्रद्धालु ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं

शनिवार को गणेश चतुर्थी उत्साह और उल्लास के साथ घर-घर में मनाई जा रही है। इस दौरान घरों में स्थापित मूर्तियों का अभिषेक, नया चोला, पूजन और आरती की गई। साथ ही 10 दिन के लिए घरों में मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इन प्रतिमाओं की श्रद्धालु अनंत चतुर्दशी तक पूजन आराधना के साथ गणेश जन्मोत्सव मनाएंगे।

गणेश जन्मोत्सव के तहत शुक्रवार को मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर, नहर के गणेश जी मंदिर, परकोटे वाले गणेश जी मंदिर, सिद्धिविनायक मंदिर सहित अन्य गणेश जी मंदिरों में सिंजारा मनाया गया। मेहंदी पूजन हुआ। गणेश जी महाराज को मेहंदी अर्पित की गई। शनिवार को सभी मंदिरों में गणेश चतुर्थी के विशेष पूजन के श्रद्धालु ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं।

गणेश जी का विशेष शृंगार, तीन महीने में तैयार नोलड़ी का नौलखा हार पहना

मोती डूंगरी गणेश जी ने सोने का मुकुट धारण कर, चांदी के सिंहासन में विराजमान हो सिंजारा मनाया। मंदिर महंत कैलाश शर्मा के सानिध्य में शाम 7 बजे गणेश जी महाराज का विशेष शृंगार किया गया। सिंजारे की मेहंदी धारण कराई गई। सोने का मुकुट धारण कराया गया। विशेष पोशाक धारण कराई गई।

सिंजारे पर गणेश जी महाराज का किया जाने वाले विशेष शृंगार में भाव स्वरूप नोलडी का नौलखा हार पहनाया गया। इस हार में मोती, सोना, पन्ना, माणिक्य आदि रत्नों का भाव दर्शाया गया। इस विशेष श्रृंगार को बनाने में तीन माह से अधिक समय लगता है। इस शृंंगार को बनाने में मंदिर महंत परिवार के सभी सदस्य शामिल होते है। इसे बनाने में बाहर के किसी व्यक्ति का हाथ नहीं लगवाया जाता।

गणेश चतुर्थी की विभिन्न झांकियां

गणेश चतुर्थी पर शनिवार को मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर में विभिन्न झांकियों के श्रद्धालु ऑनलाइन दर्शन कर सकेंगे। कोविड-19 के कारण श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश निषेध रहेगा।

  • मंगला सुबह 5:00 बजे
  • विशेष पूजन सुबह 11:15 बजे
  • श्रंगार सुबह 11:30 बजे
  • भोग दोपहर 2:15 बजे
  • संध्या शाम 7:10 पर बजे
  • शयन आरती रात 10:00 बजे होगी।

चतुर्थी शाम 7:57 तक ही रहेगी

भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी गणेश शनिवार को चतुर्थी शाम 7: 57 बजे तक रहेगी। ज्योतिषविद पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि वृश्चिक लग्न में पूजा करना फलदाई रहेगा। वृश्चिक लग्न दोपहर 1231 से 2:48 तक रहेगा। खरीदारी का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त दोपहर 12:29 से शाम शाम 5:19 बजे तक।

^पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिषविद् एवं कुंडली विश्ल़ेषक अनीष व्यास के अनुसार इस बार सूर्य सिंह राशि में और मंगल मेष राशि में हैं। यह योग 126 साल बाद बन रहा है।

^ज्योतिषाचार्य डॉ. लता श्रीमाली अनुसार गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन करने पर शास्त्र अनुसार मिथ्या कलंक लगता है। चंद्र दर्शन से बचने का समय सुबह 9:15 से रात्रि 9:33 तक है।