रायपुर :  छत्तीसगढ़ के गावों में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत गोबर गैस संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। गोबर गैस सयंत्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य लोगों को प्रदूषण रहित ईधन उपलब्ध कराना एवं सयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग कर जैविक खाद का निर्माण करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों से जो गोबर इकट्ठा होता है उसका उपयोग गोबर गैस संयंत्र के लिये एवं खाद निर्माण के लिए किया जाता है।
जशपुर जिले के जनपद पंचायत मनोरा के दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्राम पंचायत सुरजुला में बायोगैस प्लांट की स्थापना की गई है। बायोगैस प्लांट की स्थापना से ग्रामीण अंचल में निवासरत महिलाओं और परिवारों के सदस्यों में खुशी का महौल है। ग्राम पंचायत सुरजुला निवासी श्रीमती जीवन्ती तिर्की ने बताया कि बायो गैस प्लांट के स्थापना से उनके घर में ईंधन की समस्या दूर हो गई है। अब आसानी से गैस मिल जाता है। इससे उनकी एक बड़ी समस्या का समाधान हो गया है और गैस सिलेण्डर में गैस भराने जरूरत नहीं है। गोबर गैस सयंत्र के लिए गोबर की पूर्ति घरों की गाय, भैस की गोबर से आसानी से हो जाता है। प्रतिदिन 150 किलोग्राम गोबर से लगभग दिनभर की जरूरत के लिए ईंधन प्राप्त हो जाती है। श्रीमती जीवन्ती ने बताया कि गोबर गैस का उपयोग बहुत ही सरल व सस्ता है। सुबह अपने घरों से निकलने वाले गोबर को प्लांट में घोलकर डालना है और खाना बनाने के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने बताया कि गोबर गैस का उपयोग हमारे पर्यावरण को स्वच्छ रखने और पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
जशपुर जिले के ग्राम सुरजुला में जीवन्ती तिर्की, रम्थु राम, अरबिस टोप्पो, संतुराम, रामजी, असारू, दिलबहाल एवं प्रदीप मिंज के घरों में गोबर गैस संयंत्र से गैस कनेक्शन लगाया गया है। ये सभी गांववासी अपने घरों में रसोई के लिए गोबर गैस का उपयोग कर रहे हैं। इसी गांव के श्री राजेश ने बताया कि गोबर गैस सयंत्र की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधन विकसित करने का अच्छा विकल्प बनने लगा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जशपुर जिले के 65 ग्राम पंचायतों में गोबर गैस सयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 16 पंचायतों में गोबर गैस सयंत्र निर्माण प्रगतिरत है।