• अक्टूबर तक टेंडर अवॉर्ड किया जाएगा, तीन साल में पूरा होगा भूमिगत मार्ग का काम
  • धनराशि अगले साल से मिलेगी, 0.90 व 0.52% की दर से 20 वर्ष में चुकाना होगा लोन

सूरत मेट्रो के लिए लोन लेने की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। अब आने वाले वर्ष से जमीनी कार्य शुरू हो जाएगा। इसमें किस कंपनी को ठेका दिया जाएगा, यह अभी तय नहीं है। सूरत मेट्रो के कार्य का पहला चरण यानी सरकार के पैसों से होने वाला काम शुरू कर दिया गया है, जबकि लोन से होने वाला काम अगले वर्ष से शुरू किया जाएगा। सूरत मेट्रो के लिए सरकार कुल तीन संस्थाओं से लोन लेने की तैयारी कर रही थी।

इसमें जापान की जीका, फ्रांस की एएफडी एजेंसी और जर्मनी के केएफडब्ल्यू बैंक का नाम तय किया गया था। बड़ी चर्चा के बाद केएफडब्ल्यू और एएफडी से कुल मिलाकर 5434.25 करोड़ रुपए लोन लेने पर मुहर लगाई गई है। इसके लिए सभी कागजी कार्यवाही पूरी हो चुकी है। आने वाले वर्ष से लोन लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस लोन के बदले में 0.90 तथा 0.52 प्रतिशत तक ब्याज चुकाया जाएगा। लोन 20 वर्ष में चुकाना है। 5 वर्ष का अतिरिक्त समय भी दिया जाएगा। मांग पर मात्र 6 महीने में सरकार को लोन की रकम देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अधिकारियों की मानें तो लोन की रकम 2021 के पहले महीने से ली जानी शुरू कर दी जाएगी।

जापानी की जीका की शर्त कठिन, इसलिए पिछड़ी

पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि मेट्रो के लिए सरकार जीका से लोन लेगी, लेकिन जीका के नियमों के मुकाबले फ्रांस और जर्मनी के बैंक भारत के अनुकूल पाए गए। जीका लोन शुरू करने की प्रक्रिया में ही 15 महीने लगा सकती थी, जबकि ये कंपनियां मात्र 6 महीने में ही लोन दे देंगी। जीका लोन 7 साल में देती, जबकि ये कंपनियां 5 वर्ष में पूरे लोन की रकम दे देंगी। जीका ने यह भी शर्त रखी थी कि अगर फिक्स ब्याज पर लोन 0.20 प्रतिशत पर लिया जाएगा तो 30 प्रतिशत खरीदी जापान से करनी होगी। जर्मनी और फ्रांस की कंपनियों ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी।

दोनों काॅरिडोर पर खर्च होंगे 10645.57 करोड़

सूरत मेट्रो के दोनों काॅरिडोर बनाने में लगभग 10645.57 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें से मुख्य खर्च 9336.46 करोड़ रुपए और 1309.11 करोड़ टैक्स तथा अन्य सरकारी ड्यूटी पर खर्च होंगे। इसमें सरथाना से लेकर ड्रीम सिटी के रूट पर 6753.45 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस रूट में अंडरग्राउंड रूट भी शामिल है। भेसान से सारोली रूट पर 4075.69 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पूरी परियोजना की लागत 12020.32 करोड़ रुपए आएगी।

काॅरिडोर-1 के टेंडर की तारीख 4 अगस्त को खत्म

मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत सूरत मेट्रो रेल परियोजना इस साल के अंत तक जमीन पर दिखनी शुरू हो जाएगी। इसकी शुरुआत हो चुकी है। 3 साल के इंतजार के बाद मेट्रो कॉरिडोर-1 के एलिवेटेड मार्ग का टेंडर जारी किया गया था। 10 जुलाई को इसके 6.47 किमी अंडरग्राउंड मार्ग के लिए टेंडर इनवाइट किया गया था। 4 अगस्त को टेंडर भरने की तिथि समाप्त हो गई। अब ठेका देने की कवायद शुरू होगी, ताकि काम जल्द शुरू किया जा सकेगा। जीएमआरसी (गुजरात मेट्रो रेल काॅर्पोरेशन) ने अंडरग्राउंड मार्ग के लिए यह टेंडर 2 हिस्सों में जारी किया था। इसमें पहले तीन भूमिगत स्टेशन के लिए 929.46 करोड़, जबकि उसके बाद और तीन स्टेशनों के लिए 942.16 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। भूमिगत मार्ग के 6.47 किमी रूट में कुल 6 स्टेशन हैं। इसमें सूरत रेलवे स्टेशन के नीचे भूमिगत मार्ग की सेंटर लाइन होगी। यानी यहीं से अंडरग्राउंड रूट दो हिस्सों में बंटेगा। सूत्रों का कहना है कि सूरत मेट्रो रेल परियोजना का काम इसी साल नवंबर तक शुरू हो जाएगा।

कवायद: दो बार में जारी किया था 1871 करोड़ रुपए का टेंडर

सूरत मेट्रो के कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के तहत लगभग 40 किमी मेट्रो रेल लाइन का काम किया जाना है। सबसे पहले कॉरिडोर-1 के सरथाणा से ड्रीम सिटी के बीच 21.61 किमी रूट पर 20 स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें 15.44 किमी रूट पर 14 स्टेशन एलिवेटेड होंगे, जबकि 6.47 किमी रूट पर 6 स्टेशन भूमिगत होंगे। जीएमआरसी ने 10 जुलाई को अंडरग्राउंड मार्ग का 929.46 करोड़ का टेंडर जारी किया था। इसमें पहले कापोद्रा रैंप स्टेशन से सूरत रेलवे स्टेशन के बीच और सूरत रेलवे स्टेशन से चौक बाजार के बीच भूमिगत मार्ग का काम किया जाएगा। बाद में सूरत स्टेशन से मस्कती हॉस्पिटल और चौक बाजार भूमिगत मार्ग के लिए 942.46 करोड़ का टेंडर जारी किया गया।

योजना: 2024 तक सूरत मेट्रो का ट्रायल होने की संभावना

जीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कॉरिडोर-1 के लिए पहले सरथाणा से ड्रीम सिटी के बीच एलिवेटेड मार्ग के लिए लगभग 800 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था। इसे भरने की आखिरी तारीख 1 जुलाई थी। अब अगले कुछ हफ्तों में इसका ठेका दिया जाना है। अब इसी कॉरिडोर के अंडरग्राउंड मार्ग के सभी 6 स्टेशनों के लिए 1871.62 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है। इसे भरने की अाखिरी तारीख 4 अगस्त थी। अब जल्दी ही इसका ठेका दे दिया जाएगा। उसके बाद काम शुरू होने के दिन से कुल 40 महीने केवल भूमिगत मार्ग बनाने में लगेंगे। इसके साथ ही एलिवेटेड रूट का काम भी पूरा होगा तो वर्ष 2024 तक सूरत मेट्रो रेल का ट्रायल होने की पूरी संभावना है।