सुकमा : पुरखों की बरसों से की जा रही खेती की जमीन का हक मिलने से रतिराम की किस्मत चमक गई। जिला मुख्यालय से लगभग 11 किलोमीटर दूर रामाराम गांव के किसान रतिराम के पूर्वज जिस जमीन में बरसों से धान की खेती कर रहे थे, उसका मालिकाना हक मिलने से परिवार में खुशियां छा गईं। रतिराम के परिवार के जीवन का आधार इस ढाई एकड़ भूमि में धान की खेती बरसों से कर रहे थे, मगर इस जमीन का कोई दस्तावेज नहीं होने के कारण उनके मन में चिंता रहती थी। 
वर्ष 2016 में श्री रतिराम मौर्य को उनकी काबिज 2.5 एकड़ वन भूमि का अधिकार मिला तब न केवल उनकी चिंता दूर हुई, बल्कि इस जमीन में सौर सुजला योजना के तहत सोलर पम्प लगाकर 12 महीने खेती की शुरुआत भी कर दी। उन्होंने बताया कि उनके पुरखों द्वारा इस जमीन पर धान की खेती की जाती थी जिससे परिवार का भरण पोषण मात्र ही अनाज मिलता था। आज जमीन का मालिकाना हक मिलने के बाद वे धान के अलावा भी कई फसल लेकर आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हैं।
बारिश के मौसम में धान की फसल लेते हैं, जिससे प्रति वर्ष लगभग 50 क्विंटल अनाज का उत्पादन होता है, सहकारिता समिति के माध्यम से धान बेचकर उन्हें लगभग 75 हजार रुपए की आमदनी होती हैं। इस वर्ष उन्होंने खेत में धान फसल के साथ ही मक्का, मड़िया और उड़द की फसल भी लगाई है और अच्छी आमदनी की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं गर्मी के दौरान भिंडी, टमाटर, और हरी सब्जियों के फसल से रतिराम को लगभग 30 हजार तक की कमाई हुई है। वर्ष 2016 में वन अधिकार मिलने के एक साल बाद उन्हें शासन द्वारा सौर ऊर्जा के लिए सोलर पैनल और कृषि विभाग के माध्यम से खेत में सिंचाई हेतु 3 एच पी का नलकूप भी प्रदान किया गया है जिससे उन्हें अपने फसलों कि सिंचाई में बहुत मदद मिली है।
 

उन्होंने कहा कि वन अधिकार पत्र के मिलने से जीवन में बदलाव आया है, अब सभी निश्चिंत होकर अपने जमीन पर खेती करते हैं। शासन की अन्य योजनाओं से भी राहत मिली है। रतिराम ने कहा कि वर्षों से काबिज वन भूमि का अधिकार पाकर उनकेघर की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और अपने बेटे, बहू और तीन पोतों के साथ अब खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।