मुजफ्फरपुर में पहली बार मनरेगा मजदूरों ने उतारा अपना प्रत्याशी, बैल्जियम के अर्थशास्त्री कर रहे प्रचार
कुढ़नी के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर रहेगीकुढ़नी के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर रहेगी
मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में मनरेगा से जुड़े मजदूरों ने पहली बार अपने बीच का प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है. संजय कुमार उर्फ संजय सहनी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में है.

मुजफ्फरपुर. बिहार विधानसभा में इस बार कई रंग देखने को मिल रहे हैं. उनमें से एक खास रंग मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में दिखाई पड़ रही है. यहां निर्दलीय प्रत्याशी चर्चा का विषय बना हुआ है. किसी खास जाति और धर्म से वोटरों को अपना आधार नहीं बनाते हुए सिर्फ मजदूरों के हक की आवाज को आधार बनाकर यह निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में लोगों द्वारा दिए गए चंदे की रकम से चुनाव लड़ रहा है. यह प्रत्याशी मनरेगा मजदूर पिछले 8 सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहा है.

मुजफ्फरपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में मनरेगा से जुड़े मजदूरों ने पहली बार अपने बीच का प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है. संजय कुमार उर्फ संजय सहनी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में है. संजय सहनी सातवीं पास हैं, लेकिन मनरेगा से जुड़े मजदूरों की लड़ाई पिछले 8 सालों से सफलतापूर्वक लड़ी है. दिल्ली में बिजली का मिस्त्री का काम करने वाले संजय सहनी आरटीआई से जानकारी जुटाकर अपने गांव में मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने घर वापस आया था. उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा लड़ाई


मनरेगा में काम करने वाली महिला मजदूरों का संगठन समाज परिवर्तन शक्ति संगठन बनाकर संजय ने मनरेगा मजदूरों से जुड़ी तमाम सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार का विरोध करना शुरू किया. सिर्फ कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में ही 35 हजार महिला मजदूरों का संजय ने संगठन से जोड़ा. साथ ही मुजफ्फरपुर के 9 प्रखंडों में बड़ी संख्या में महिला मजदूरों को संजय ने जोड़ा है. मजदूरों के हक के लिए संघर्ष करने और सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार का विरोध करने के कारण संजय की लोकप्रयिता काफी बढ़ गई है. इतना ही नहीं कोरोना काल में फंसे मजदूरों को स्टेंडर्ड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क के जरिये संजय ने काफी लाभ पहुंचाया जिसमें कुढ़नी विधानसभा से 10 हजार से अधिक मजदूर सकुशल घर वापस आ सके. अब यही मजदूर वर्ग चुनाव में संजय को विधानसभा में भेजने की तैयारी में जुटे हुए हैं.
 

महिलाओं ने थामी चुनाव प्रचार की कमान

संजय सहनी के चुनाव प्रचार की कमान मुख्य तौर पर महिलाओं ने संभाल रखा है. साथ ही बड़ी संख्या में कोरोना काल में बेरोजगार हुए युवा भी संजय सहनी के चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं, लेकिन इनमें भी खास हैं बैल्जियम के अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और दिल्ली, बंगलुरू और आन्ध्र प्रदेश से आने वाले कुछ प्रोफेसर और छात्र. ज्यां द्रेज संजय सहनी के नामांकन से लेकर लगातार कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में हैं. बाहर से आये छात्र सोशल मीडिया में प्रचार की कमान संजय के लिए संभाले हुए हैं. स्थानीय भाषाओं में खासकर महिलाओं से बात कर संजय सहनी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने में जुटे हैं. मुख्य राजनीतिक दलों से अलग हटकर सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार का विरोध कर अपने वाजिब हक के लिए गोलबंद हो रहे समाज के लिए इसे परविर्तन की बयार के तौर पर देखा जा रहा है, जहां अनपढ़ महिलाएं और युवा भी अपने राजनीतिक हक और हिस्सेदारी के लिए आग आ रहे हैं.

सत्यमेव जयते में दिखाई गई संजय के संघर्ष की कहानी

काफी कम पढ़े-लिखे संजय सहनी मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ते- लड़ते काफी कुछ सीखा है. भारत सरकार ने तिब्बत में मनरेगा के एम्बेसेडर के तौर पर भेजा तो अभिनेता आमिर खान के चर्चित शो सत्यमेव जयते में संजय के संघर्ष की कहानी दिखाई गई. दूसरी तरफ संजय सहनी में कई झूठे अपराधिक मुकदमे भी दर्ज कराए गए. बावजूद इसके शोषितों वंचितों की मुखर आवाज संजय सहनी बने रहे. इस चुनाव में 35 हजार मनरेगा से जुड़ी महिला मजदूर और उनके परिवार के वोट के साथ ही 10 हजार वैसे मजदूर जिसे लॉकडाउन के समय मदद पहुचाई गई है. आधार वोट बैंक के तौर पर है, जबकि 2015 के चुनाव में महज 64 हजार वोट लाने वाले भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई थी. ऐसे में कुढ़नी के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर रहेगी.