दुबई । खाड़ी देशों को स्त्रियों को सीमित अधिकार को लेकर ही जाना जाता है। सऊदी अरब में करीब एक साल पहले ड्राइविंग का अधिकार मांगने को लेकर हिरासत में ली गई महिला कार्यकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें यातनाएं दी गईं और उनका यौन उत्पीड़न किया गया। रियाद की एक अपराध अदालत में बुधवार को 11 महिलाओं पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार समूहों से संपर्क रखने के लिए आरोप तय करने के लिए दूसरी बार सुनवाई हुई। इस दौरान विदेशी पत्रकारों और राजनयिकों को अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। अदालत में इन महिलाओं ने रोते हुए तीन जजों की पैनल के सामने कहा कि पूछताछकर्ताओं ने उन्हें बिजली के झटके लगाए, हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और यौन शोषण किया गया। सऊदी अरब सरकार मानवाधिकारों के अपने रिकॉर्ड को लेकर गहन अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना कर रही है। हालांकि, वह महिलाओं पर अत्याचार और उनके उत्पीड़न से साफ इंकार करती रही हैं। जिन महिलाओं को हिरासत में लिया गया है, उनमें प्रमुख कार्यकर्त्ता लौजेन अल-हथलौल, ब्लॉगर इमान अल-नफजान और प्रोफेसर हातून अल-फासी शामिल हैं।
इन कार्यकर्ताओं को महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगा प्रतिबंध हटने से ठीक पहले हिरासत में लिया गया था। महिलाओं ने गाड़ी चलाने के अधिकार और प्रतिबंधात्मक संरक्षकता प्रणाली को समाप्त करने के लिए अभियान चलाया था। लौजेन के भाई-बहनों ने सऊदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। फिलहाल विदेश में रह रहे उनके भाई-बहनों का आरोप है कि उन्हे यातना देने में वली अहद (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान के शीर्ष सलाहकार सऊद अल कहतानी का हाथ है।