ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी अर्थात् निर्जला एकादशी वर्ष भर में पढ़ने वाली एकादशियो में सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी गई है। निर्जला एकादशी इस वर्ष 2 जून दिन मंगलवार को है ।शास्त्रों में कहा गया है यदि कोई वर्ष मैं पढ़ने वाली छब्बीस एकादशी व्रत न कर पाए तो भी निर्जला एकादशी का व्रत करने से समस्त एकादशी का व्रत करने का फल मिलता है।

इसलिए इसे कहते हैं भीमसेनी एकादशी
ज्येष्ठ मास में पड़ने के कारण इसी एकादशी को ज्येष्ठ अर्थात बड़ी एकादशी भी कहा जाता है वही पांडवों भाईयो मे भीम के द्वारा एकादशी व्रत रखने के कारण इसी एकादशी को "भीमसेनी एकादशी" भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी व्रत कठिन होने के साथ-साथ भीषण गर्मी में जल के महत्व को बताने वाला व्रत है।

सिर्फ स्नान और आचमन के लिए ले सकते हैं जल
महामृत्युंजय सेवा मिशन अध्यक्ष संजीव शंकर बताते हैं कि निर्जला एकादशी के दिन स्नान एवं आचमन के लिए जल ग्रहण करने की छूट है अन्यथा व्रत रखने वाले व्यक्ति को जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।जल से भरा कलश,पंखा, मौसमी फल खरबूजा तरबूज,छतरी इत्यादि दान करने का बड़ा महत्व है।एकादशी व्रत कथा में कहा गया है कि एकादशी व्रत एकादशी तिथि सूर्योदय के समय से प्रारंभ

करके द्वादशी तिथि सूर्योदय तक रखना चाहिए इस वर्ष

एकादशी तिथि प्रारम्भ - जून 01, 2020 को दोपहर 2:57 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त - जून 02, 2020 को दोपहर 12:04 बजे तक ।
व्रत का पारण (व्रत खलोने का) समय 3 जून को प्रात: 05:23 से 08:10 तक रहेगा।