नई दिल्ली | आज किसान आंदोलन का 41वां दिन है. अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए किसानों ने नई रणनीति तैयार की है. 8 जनवरी को किसानों की सरकार के साथ 9वें दौर की बातचीत तय है, लेकिन इससे पहले कल यानि 7 जनवरी को किसान बड़ा प्रदर्शन करने वाले हैं. अगर 8 जनवरी की बैठक से हल नहीं निकला तो 9 जनवरी को कृषि कानून की प्रतियां जलाने की तैयारी है. साथ ही 9 जनवरी से ही हरियाणा में किसान संगठन घर घर जाकर लोगों से संपर्क शुरु करेंगे और 26 जनवरी के दिन दिल्ली में ट्रैक्टर परेड की चेतावनी दी गई है.
किसानों के आंदोलन को लेकर शिवसेना ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, 'कृषि कानून को रद्द करवाने को लेकर किसान डटे हुए हैं. दिल्ली की सीमा पर अब तक 50 किसानों ने अपनी जान गंवाई है. सरकार की नजर में इन किसानों के बलिदान की कोई कीमत नहीं है. सरकार में इंसानियत होती तो कृषि कानून को तात्कालिक रूप से स्थगित करवाती और किसानों की जान से खेले जानेवाले इस खेल को रोकती.'
दिल्ली के कई जगहों में बारिश हो रही है. बारिश की वजह से कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान प्रभावित हुए. हालांकि, वह अब भी घर वापसी के लिए तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि सरकार कानून वापस लेगी फिर ही हम घर जाएंगे.