चीन की हर चाल से वाकिफ है सिक्किम के हर गांव, पैतरों को लेकर हुए चौकन्नें

नाथुला पास जिस इलाके में ठीक 53 साल पहले सितंबर के महीने में भारतीय सेना ने चीनी सेना को धूल चटा कर ड्रैगन को चारों खाने चित किया था. सिक्किम के उसी इलाके के पास पहुंचा चीन की कारगुजारी क्या है? कैसे उससे सावधान रहना चाहिए और सिक्किम के लोगों ने 53 साल पहले उस जीत से क्या सबक लिया
पिछले 53 साल में नाथुला पास के नजदीक रांका गांव और यहां रहने वाले लोगों ने बहुत कुछ सीखा है जब नाथुला पास पर भारत के वीरों ने अपनी वीरता का परिचय दिया था. उस वक्त भी सितंबर का ही महीना था और चीन लगातार अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से मुकर रहा था. भारत चीन विवाद सामने आने के बाद चीन के हर पैतरे को लेकर एक बार फिर वो चौकन्ने हैं. पिछले 53 साल में नाथुला पास के नजदीक रांका गांव और यहां रहने वाले लोगों ने बहुत कुछ सीखा है जब नाथुला पास पर भारत के वीरों ने अपनी वीरता का परिचय दिया था. उस वक्त भी सितंबर का ही महीना था और चीन लगातार अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से मुकर रहा था. भारत चीन विवाद सामने आने के बाद चीन के हर पैतरे को लेकर एक बार फिर वो चौकन्ने हैं.
पिछले 53 साल में नाथुला पास के नजदीक रांका गांव और यहां रहने वाले लोगों ने बहुत कुछ सीखा है जब नाथुला पास पर भारत के वीरों ने अपनी वीरता का परिचय दिया था. उस वक्त भी सितंबर का ही महीना था और चीन लगातार अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से मुकर रहा था. भारत चीन विवाद सामने आने के बाद चीन के हर पैतरे को लेकर एक बार फिर वो चौकन्ने हैं.

चीन की हर चाल और कारगुजारी से भारत चीन सीमा विवाद के बाद पहुंचा भारत-चीन सीमा से सटे सिक्किम के रांका गांव. यहां हर घर में दो-तीन पुश्तों से युवा भारतीय सेना के गोरखा व अन्य रेजीमेंट में भर्ती हो रहे हैं. अब चीन की चालबाजी सामने आने के बाद ये उसी रणनीति पर अमल करने की बात कर रहे हैं जैसे उन्होने भारत-चीन युद्ध के दौरान रणनीति पर अमल किया था. चीन की हर चाल और कारगुजारी से भारत चीन सीमा विवाद के बाद भारत-चीन सीमा से सटे सिक्किम के रांका गांव. यहां हर घर में दो-तीन पुश्तों से युवा भारतीय सेना के गोरखा व अन्य रेजीमेंट में भर्ती हो रहे हैं. अब चीन की चालबाजी सामने आने के बाद ये उसी रणनीति पर अमल करने की बात कर रहे हैं जैसे उन्होने भारत-चीन युद्ध के दौरान रणनीति पर अमल किया था.
चीन की हर चाल और कारगुजारी से भारत चीन सीमा विवाद के बाद भारत-चीन सीमा से सटे सिक्किम के रांका गांव. यहां हर घर में दो-तीन पुश्तों से युवा भारतीय सेना के गोरखा व अन्य रेजीमेंट में भर्ती हो रहे हैं. अब चीन की चालबाजी सामने आने के बाद ये उसी रणनीति पर अमल करने की बात कर रहे हैं जैसे उन्होने भारत-चीन युद्ध के दौरान रणनीति पर अमल किया था.


यहां रह रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि हमेशा से ही यही देखा जा रहा है कि चीन पलटी मार जाता है.  130 साल पुराना सिक्किम में भारत चीन सीमा के पास घर है जहां तीन पीढ़ी से लोग भारतीय सेना में भर्ती होते रहे हैं. इस घर में रह रहे लोगों ने अपने अनुभव हमसे साझा किए. यहां रह रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि हमेशा से ही यही देखा जा रहा है कि चीन पलटी मार जाता है.
यहां रह रहे पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि हमेशा से ही यही देखा जा रहा है कि चीन पलटी मार जाता है. सिक्किम में भारत चीन सीमा के पास घर है जहां तीन पीढ़ी से लोग भारतीय सेना में भर्ती होते रहे हैं. इस घर में रह रहे लोगों ने अपने अनुभव हमसे साझा किए.

छविलाल भारतीय सेना से छत्तीस साल पहले रिटायर हो चुके हैं. 1967 का भारत चीन विवाद उन्हे याद है तब उन्हे भारतीय सेना में भर्ती हुए सिर्फ दो साल ही हुए थे, लेकिन क्या क्या चीन की ओर से पैंतरे अपनाए गए थे ये उसे याद करते हैं, उनके मुताबिक चीन कहता कुछ और करता कुछ है. हमेशा से वो मानसिक दबाव बनाने की कोशिश करता है. छविलाल भारतीय सेना से छत्तीस साल पहले रिटायर हो चुके हैं. 1967 का भारत चीन विवाद उन्हे याद है तब उन्हे भारतीय सेना में भर्ती हुए सिर्फ दो साल ही हुए थे, लेकिन क्या क्या चीन की ओर से पैंतरे अपनाए गए थे ये उसे याद करते हैं, उनके मुताबिक चीन कहता कुछ और करता कुछ है. हमेशा से वो मानसिक दबाव बनाने की कोशिश करता है.
छविलाल भारतीय सेना से छत्तीस साल पहले रिटायर हो चुके हैं. 1967 का भारत चीन विवाद उन्हे याद है तब उन्हे भारतीय सेना में भर्ती हुए सिर्फ दो साल ही हुए थे, लेकिन क्या क्या चीन की ओर से पैंतरे अपनाए गए थे ये उसे याद करते हैं, उनके मुताबिक चीन कहता कुछ और करता कुछ है. हमेशा से वो मानसिक दबाव बनाने की कोशिश करता है.

छविलाल के बेटे भी भारतीय सेना में हैं. उनकी तरह इस गांव के हर घर का सदस्य भारतीय सेना अपनी सेवाएं दे रहा है या फिर पूर्व कर्मी है. सूर्यकुमार के दादाजी भारतीय सेना में थे और वो बताते थे कि भारत चीन सीमा के साथ विवाद जब हुआ था तो फिजिकल ट्रेनिंग उनको दी जाती थी ताकि वो तैयार रह सकें. सिक्किम में भारतीय सेना के गोरखा रेजीमेंट से बड़ी तादात में भर्ती होती है और रांका जैसे गांव के नौजवान और पुरानी पीढ़ी के लोग हमेशा देश की सेवा के लिए आगे खड़े रहते हैं. छविलाल के बेटे भी भारतीय सेना में हैं. उनकी तरह इस गांव के हर घर का सदस्य भारतीय सेना अपनी सेवाएं दे रहा है या फिर पूर्व कर्मी है. सूर्यकुमार के दादाजी भारतीय सेना में थे और वो बताते थे कि भारत चीन सीमा के साथ विवाद जब हुआ था तो फिजिकल ट्रेनिंग उनको दी जाती थी ताकि वो तैयार रह सकें. सिक्किम में भारतीय सेना के गोरखा रेजीमेंट से बड़ी तादात में भर्ती होती है और रांका जैसे गांव के नौजवान और

पुरानी पीढ़ी के लोग हमेशा देश की सेवा के लिए आगे खड़े रहते हैं.

छविलाल के बेटे भी भारतीय सेना में हैं. उनकी तरह इस गांव के हर घर का सदस्य भारतीय सेना अपनी सेवाएं दे रहा है या फिर पूर्व कर्मी है. सूर्यकुमार के दादाजी भारतीय सेना में थे और वो बताते थे कि भारत चीन सीमा के साथ विवाद जब हुआ था तो फिजिकल ट्रेनिंग उनको दी जाती थी ताकि वो तैयार रह सकें. सिक्किम में भारतीय सेना के गोरखा रेजीमेंट से बड़ी तादात में भर्ती होती है और रांका जैसे गांव के नौजवान और पुरानी पीढ़ी के लोग हमेशा देश की सेवा के लिए आगे खड़े रहते हैं.