देश-दुनिया में मशहूर मैसूर का 10 दिनी दशहरा उत्सव शनिवार को कोविड -19 महामारी के बीच शुरू हुआ, हालांकि उत्सव से हमेशा की तरह रहने वाली भव्यता नदारद रही। दशहरा कर्नाटक के लोगों द्वारा मनाए जाने वाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है और इसे 'नाडा हब्बा' (राज्य त्योहार) माना जाता है।

उत्सव की शुरूआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च, बेंगलुरु के निदेशक डॉ.सी.एन.मंजूनाथ और मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने चामुंडी पहाड़ी के ऊपर से मैसूरु राजघरानों के प्रमुख देवता चामुंडेश्वरी की मूर्ति पर फूलों की वर्षा करके की। बता दें कि राज्य सरकार हर साल दशहरा उत्सव के लिए विभिन्न क्षेत्रों से एक प्रमुख व्यक्तित्व को आमंत्रित करती है। इस साल राज्य सरकार ने डॉक्टरों की सेवा और फ्रंटलाइन कोविड-19 योद्धाओं के प्रतिनिधि के तौर पर डॉ.मंजूनाथ को चुना।

डॉ.मंजूनाथ पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के दामाद हैं लेकिन इतने प्रभावशाली परिवार से होने के बाद भी उनकी छवि गरीब लोगों के बीच 'लोगों के डॉक्टर' की है।

इस समारोह के लिए डॉ. मंजूनाथ के साथ राज्य सरकार ने 6 कोविद योद्धाओं को भी चुना है।

बता दें कि मैसूरु में बड़ी संख्या में कोविड मामले दर्ज हुए हैं और सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए दशहरा के दौरान सभी मानदंडों का सख्ती से पालन करने पर जोर दे रही है।

मैसूरु प्रशासन ने अधिकांश समारोहों में लोगों को प्रतिबंधित कर दिया है और लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था की है। इसके अलावा उत्सव के 10 वें दिन विजयादशमी को निकलने वाली देवी चामुंडेश्वरी की 'जंबो सवारी' को केवल महल परिसर तक ही सीमित कर दिया है। महल में भी शाही परिवार ने समारोहों को सादगी से आयोजित करने का फैसला किया है।

त्योहार के दौरान शाही महल और मैसूरु शहर के कई हिस्सों को शाम के समय हजारों बल्बों से रोशन किया जाएगा।

इस उत्सव की शुरूआत सबसे पहले मैसूर में वाडियार के राजा, राजा वाडियार प्रथम ने वर्ष 1610 में की थी।