नई दिल्ली । भारत में कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या वीकेंड में 11 लाख के पार पहुंच गई, जिसमें से तकरीबन एक लाख लोग दो दिनों में स्वस्थ हुए।  देश में कोरोना संक्रमण से 51, 845 लोग स्वस्थ हुए, जबकि रविवार को यह संख्या 40,449 रही। आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 18,03,267 संक्रमित लोगों में से अब तक 38,159 लोगों की मौत हो चुकी है। बीमारी की मृत्यु दर इस समय 2.12 फीसदी है। देश में मरीज 21.2 दिनों में दोगुने हो रहे हैं। कोविड-19 पर बनी राष्ट्रीय टास्क फोर्स के प्रमुख नीति अयोग के सदस्य वीके पॉल का कहना है कि रुझानों से महामारी पर भारत की प्रतिक्रिया का संकेत 'सामाजिक स्तर पर और अस्पतालों में देखभाल सहित विभिन्न स्तरों पर सुधार है।उन्होंने कहा, 'यह बताता है कि हमने अपने पॉजिटिव मामलों की देखभाल करना सीख लिया है। हमने सीखा है कि कैसे कार्य करना है और क्या काम करता है और क्या नहीं। हम चिकित्सकीय रूप से अधिक संगठित और व्यवस्थित उपचार प्रदान करने में सक्षम हैं। कोविड -19 प्रबंधन में शामिल लोग दिन-रात पढ़कर और एक-दूसरे से सीख रहे हैं। आंकड़ों को देखकर माना जा रहा है कि जब यह महामारी खत्म होने के कगार पर होगी, तब देश में ठीक होने वालों की दर 90 फीसदी से अधिक होगी। इसके अलावा मृत्यु दर 2-3 फीसदी के बीच होने की आशंका है। इसी तरह, जर्मनी में दो लाख संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें अभी सिर्फ 8,300 एक्टिव केस हैं। रिकवरी रेट 91 फीसदी का है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले दस देशों के संक्रमण, रिकवरी रेट और मृत्यु दर को देखें तो उसमें से अमेरिका में ही सिर्फ 50 फीसदी की रिकवरी रेट है। एक अगस्त तक भारत में 5,79,183 एक्टिव केस हैं, जोकि कुल मामलों का 32.12% है। वर्तमान दर के हिसाब से देखें तो एक्टिव केस के दोगुने होने की रफ्तार 27.3 दिन है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक वरिष्ठ महामारी विशेषज्ञ ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया,  'भारत की मृत्यु दर 3 फीसदी से कम है, जिसका अर्थ है कि संक्रमित होने वाले लगभग 97-98% लोग अंततः ठीक हो जाएंगे। रिकवरी दर को केस लोड के साथ भी जोड़ा जाता है; अगर केस लोड अधिक है, तो रिकवरी में अधिक समय लगेगा क्योंकि इसमें गंभीर मामलों का प्रतिशत भी शामिल होगा। अधिकारी ने कहा कि संख्याएं रिपोर्टिंग में सटीकता को भी दर्शाती हैं, जो राज्यों के बीच भिन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा, 'अगर पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़ती है, तो ठीक होने की दर स्वचालित रूप से धीमी हो जाएगी। इसी वजह से यह बताता है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल आदि जैसे राज्यों में कम रिकवरी रेट क्यों हैं। वहीं, जिन राज्यों में ज्यादा रिकवर हो रहे हैं, उसमें रोजाना सामने आने वाले मामलों के कम होने को बताता है।' वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के महामारी विज्ञान में प्रोफेसर डॉ. गिरिधर बाबू कहते हैं कि लगता है कि पिछले दो से तीन हफ्तों में अधिक संख्या में लोग डिस्चार्ज हुए हैं और इनमें से अधिकांश बिना लक्षण वाले हो सकते हैं।