क्या करना चाहिये था,क्या कर रहे थेऔर अब आगे क्या करना चाहिये??

राहु के फैलाये हुए जाल से भारत बाहर निकलेगा।

राहु मायाजाल हे,प्रभावी गृह(छाया) हे और अब तक अपने स्व नक्षत्र आर्द्रा में था तो उसकी यह ताकत बढी हुई थी।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की विगत 22 अप्रैल 2020 की सुबह 8 बज कर 51 मिनट पर स्पष्ट राहु आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा मे आ गए थे, इसी क्रम मे कल,20 मई 2020 की दोपहर बाद 3 बजकर 25 मिनट पर मध्यम राहु भी आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा नक्षत्र मे आ गए हैं। कोरोना पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

अभी वक्रि शनि,गुरु और शुक्र का गोचर हे,वक्रि होना,थोडा मुड़के देखना,जायजा लेना,और मृग्शीर्ष का स्वभाव खोजी हे,कुल मिलाकर पोलिटिकल लेवल पर,सोशल लैवल पर,

व्यवहार लेवल पर, आर्थिक स्तर पर,मैडिसिन लेवल पर,खेती , फूड,,जीवन स्तर  & अध्यात्मिक लैवल पर इतने जल्दी परिवर्तन शुरु होंगे मानो एक आंधी आयी हे,वैसे भी इसकी नीव डालनी जैसे शुरु ही हो रही हे, कोरोना घटेगा या बढ़ेगा येह कहेना मुश्किल हे लेकिन उसके प्रत्यक्ष प्रभाव से ज्यादा जोभी अप्रत्यक्ष प्रभाव मनुष्य जीवन पर हुए हैं उसमे जरुर कमी आ सकती हे
कुल मिलाकर ,राहु जब तक नवमंश मे वृश्चिक मे हे तब तक आंधी तुफानी बारिश,आगजनी  या फिर भूकम्प और सुनामी जैसी कोई भी नेचुरल दुर्घटना को नकार नही सकते ।

मोदी जी की लोकप्रियता मे कमी आने के बाद,कुछ ऐसी घटनाए,या फिर उनके द्वारा लिये गये स्टेपसकी वजह से,फिर से वह लोकप्रियता के शिखर पर आरूढ़ हो सकते हे और अपने आपको ग्लोबल लीडर एवम अध्यात्मिक पुरुष के रूप मे प्रस्थपित करसकते हे।

केवल चीन और  पाकिस्तान ही नही,बंगला देश भी हमारे खुले विरोधी ओ मे शामिल,होकर,अचानक हमला करकर हमे परेशान कर सकते हे,खासकर पश्चिम बंगाल और कोलकाता के आसपास के प्रदेश मे उपद्रव हॉ सकता हे।

गुरुवार, 21 मई 2020 को भरणी नक्षत्र है। भरणी नक्षत्र आज देर रात 1 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। सत्ताईस नक्षत्रों में भरणी नक्षत्र का द्वितीय यानि दूसरा स्थान है। भरणी का अर्थ होता है- भरण-पोषण करना। भरणी नक्षत्र के चारों चरण मेष राशि में आते हैं। लिहाजा इसकी राशि मेष है। इसका प्रतीक चिन्ह त्रिकोण आकृति को माना जाता है।

अगर भरणी नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वालों की बात की जाये, तो ये सच बोलने वाले, धार्मिक कार्यों के प्रति रूचि रखने वाले, उत्तम विचारों के धनी, साहसी, प्रेरणादायक, रचनात्मक क्षेत्रों में सफल, चित्रकारी और फोटोग्राफी में अभिरुचि रखने वाले होते हैं। साथ ही ये लोग कठिन से कठिन कार्य करने से भी नहीं घबराते हैं और अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण भरणी नक्षत्र के जातक अपने जीवन में कई बार विफल होने के बाद भी हार नहीं मानते और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रयास करते रहते हैं और अंतत: अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सफल भी होते हैं।

आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी स्वयं राहु है, आर्द्रा नक्षत्र का बिम्बांकन  भगवान शंकर के नील कंठ से किया जाता है। एक गला जो विष से भर गया है, और कोरोना का स्वरूप भी गले की विषाक्तता से ही पूरा होता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब राहू महाशय, मंगल के नक्षत्र में जा रहे हैं। मंगल के आगे अमूमन राहु शांत ही रहता है।

पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि ज्योतिष की एक विधा के अनुसार राहू अगर हाथी है तो मंगल महावत है। लिहाजा अपनी उच्च राशि मे होते हुए भी राहू, मंगल के नक्षत्र मे गोचर करते हुए कम हानिकारक हो जाएगा। इस महामारी का कारक राहू ही है, शनि ओर केतु उसके सहायक हैं और गुरु इस सिस्टम मे कैटेलिस्ट यानी उत्प्रेरक की भूमिका मे है। राहू के नक्षत्र परिवर्तन के साथ ही जीवन नई पटरी पर चल पड़ेगा, कोरोना की संख्या मे बढ़ोत्तरी भले ही दिखे लेकिन इसकी बारंबारता मे निश्चित रूप से कमी आएगी। इस पर प्रभावी रोकथाम के उपाय निकलेंगे।

आगामी जून, जुलाई महीने के मध्य 2 चन्द्र ग्रहण तथा 1 सूर्य ग्रहण घटित होंगे। दोनों चन्द्र ग्रहण उपछाया (मान्द्य) होंगे जो क्रमशः 5-6 जून की दरमियानी रात और 5 जुलाई को होंगे, वही कंकणाकृति सूर्य ग्रहण 21 जून को होगा। 21 जून को आषाढ़ मास की अमावस्या, मृगशीर्ष नक्षत्र, मिथुन राशि में होने वाले इस सूर्य ग्रहण 12 मिनिट से अधिक नहीं दिखाई देगा। भारत, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका के कुछ शहरो में दिखाई देगा यह ग्रहण। इसके फलस्वरूप अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त, स्टॉक मार्केट होगा धड़ाम, प्राकृतिक आपदाओं व नए-नए संक्रामक रोगों से भयावहता बढ़ेगी, जून-जुलाई देश-दुनिया के लिए रहेंगे भारी

वैश्विक महामारी कोरोना अभी अपने शीर्ष की और बढ़ रही है, मंगल के मकर से कुम्भ राशि में प्रवेश के साथ ही मकर राशि में मंगल-शनि-गुरु की युति भंग हुई, इस युति के भंग होने के साथ ही राहत, उम्मीद का आकलन करना शुरू हो गया। लेकिन यह राहत इतनी बड़ी भी नहीं की कोरोना का पतन हो जाए। ग्रह गोचर कुछ अलग ही इशारा कर रहे हैं।

राहु के तीसरे चरण के तुला नवमांश प्रवेश के समय के बाद, यानी 22 जुलाई 2020 के बाद कोरोना की ही नही और भी कोइ नई दवाई का अविष्कार हो सकता हे ।

प्रधानमंत्री मोदी जी के लिये बडे आत्ममंथन समय आ गया हे।

पंडित दयानन्द शास्त्री