नई दिल्ली. पंजाब में हुए घटनाक्रम के बाद कांग्रेस में कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. कपिल सिब्बल खुलेआम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं. बता दें कि गुलाम नबी आजाद ने भी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर तत्काल प्रभाव से कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक बुलाने की मांग की थी. गुलाम नबी आजाद के खत के बाद सोनिया ने कहा था कि जल्द ही बैठक बुलाई जाएगी, हालांकि इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई थी.

इस खत से पहले G-23 के कुछ सदस्यों ने एकसाथ सोनिया गांधी को फोन किया था और कहा था कि जल्द ही इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया तो वह लंबे समय तक चुप नहीं रहेंगे. सूत्रों का कहना है कि G-23 के कुछ सदस्यों का मानना है कि भले ही वह परिणाम जानते हों, फिर भी वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़कर अपनी बात साबित करना चाहते हैं. समूह के एक वरिष्ठ सदस्य ने न्यूज18 से खास बातचीत में कहा, इसे विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह दिखाने का प्रयास किया जाना चाहिए कि कांग्रेस लोकतांत्रिक है और बीजेपी के विपरीत एक विकल्प को जगह देती है. बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि अगर कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होता है तो जी-23 दो हिस्सों में बंट सकता है.
अगर अध्यक्ष पद पर जी-23 से कोई नेता खड़ा होता है तो यह पहली बार नहीं होगा. वर्ष 2000 में जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र भी सोनिया गांधी के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जितेंद्र ने जब दावेदारी ठोकी तो उनका मानना था कि बतौर कार्यकर्ता पार्टी में वह सोनिया गांधी से बहुत वरिष्ठ हैं, इसलिए उन्हें अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. हालांकि उन्‍हें बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा. चुनाव में पड़े 7,542 वोटों में से उन्‍हें महज 94 वोट मिले. जितेंद्र की हार पर यह भी कहा जाता है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावों में परिणाम पहले से ही फिक्स होता है. जी-23 के ज्यादातर नेता इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि कांग्रेस को गांधी परिवार के अलावा कोई और नहीं चला सकता.वहीं, जी-23 के कुछ नेताओं का मानना है कि अगर पार्टी में बदलाव होता है तो कांग्रेस की छवि में सुधार आ सकता है. कपिल सिब्बल, गुलाब नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस, चिट्ठी इस बात का प्रत्यक्ष सुबूत है कि अब पार्टी आंतरिक तौर पर बदलाव चाहती है. हालांकि कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस गांधी परिवार से ऊपर नहीं उठ सकती. सोनिया के बाद राहुल गांधी और उनकी युवा ब्रिगेड पार्टी की कमान संभाले इसके लिए आंतरिक तौर पर तैयारियां की जा रही है. जिग्नेश मेवाणी और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल किया जा रहा है ताकि पुराने गार्ड को रिप्लेस किया जा सके.