अमझेरा के बारे में कहा जाता है कि यह जगह मुख्यमंत्रियों के लिए ठीक नहीं है. यहां जब भी कोई मुख्यमंत्री सभा करने आता है तो वह फिर मुख्यमंत्री नहीं बन पाता है. यही वजह है कि 14 साल से कोई मुख्यमंत्री यहां सभा करने नहीं आया. दिग्विज सिंह, उमा भारती और बाबूलाल गौर यहां सभा करने आए थे लेकिन इसके बाद वे फिर मुख्यमंत्री नहीं बन सके. यही वजह रही कि इस क्षेत्र का समुचित विकास नहीं हो सका. वैसे अमझेरा 1857 की क्रांति के अमर शहीद बख्तावर सिंह की नगरी है. यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कई बार धार जिले में आए, लेकिन वे अमझेरा नहीं आए. वह यहां से पांच किमी दूर मांगोद में सभा कर चुके हैं. इस बार भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है.

कल यानी 11 मई को यहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा होने वाली है और यहां के इतिहास को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ के यहां आने पर संशय बना हुआ है. क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि इस बार हम सीएम कमलनाथ को अमझेरा लाकर इस भ्रम को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे.
बताया जाता है कि दिग्विजय सिंह 10 फरवरी 2003 को यहां आए थे. उमा भारती 10 फरवरी 2004 में अमझेरा आई थीं. बाबूलाल गौर 17 नवंबर 2005 को अमझेरा आए थे.

राहुल गांधी की यहां सभा होनी है और प्रशासन मधुमक्खियों से खौफजदा हैं. मांगोद मनावर मार्ग पर अमका-झमका मंदिर के निकट राहुल गांधी की सभा होने वाली है. सभास्थल से करीब 200 मीटर की दूरी पर मंदिर परिसर में पेड़ों पर मधुमक्खियों के करीब 11 बड़े-बड़े छत्ते हैं. इस संबंध में बुधवार को कलेक्टर ने वन विभाग के अधिकारियों को मधुमक्खियों के छत्ते हटाने के निर्देश दिए थे. वन विभाग का कहना है कि छत्ते हटा देने के बाद भी मधुमक्खियां उस स्थान से पांच दिन तक नहीं हटेंगी, ऐसे में यदि कुछ हो गया तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. हेलीकॉप्टर के आने पर चलने वाली तेज हवा से भी मधुमक्खियों के उड़ने की आशंका है.