पेइचिंग । दुनिया को कोरोना वायरस बांटकर लाखों लोगों की जानें लेने वाले पडोसी देश चीन की आधिकारिक मीडिया ने अब तजिकिस्तान के पामीर पहाड़ों पर दावा करना शुरू कर दिया है जिससे इस बेहद गरीब मध्य एशियाई देश की चिंता बढ़ गई है। चीन और तजिकिस्तान ने वर्ष 2010 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इसके तहत उसे पामीर इलाके का 1158 किलोमीटर इलाका उसे मजबूरन देना पड़ा था। चीनी इतिहासकार चो याओ लू ने चीनी स्रोतों के हवाले से दावा किया है कि पूरा पामीर क्षेत्र चीन का है और चीन को इसे वापस लेना चाहिए। चीन में छपे एक लेख से तजिकिस्तान के अधिकारियों की टेंशन बढ़ गई है। इस दावे के बाद रूस का भी ध्यान इस ओर बढ़ गया है जो इस मध्य एशियाई देशों को अपना रणनीतिक इलाका मानता है।चीन तजिकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर ताशकुर्गान के पास एक एयरपोर्ट बना रहा है जिससे दुशांबे की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है। चीनी इतिहासकार ने कहा कि चीनी राज्य की स्थापना के बाद सबसे पहले हमें अपनी खोई हुई जमीन को वापस लेना होगा। कुछ जमीनें हमें वापस मिल गई हैं और कुछ अभी भी पड़ोसी देशों के कब्जे में है। इनमें से एक प्राचीन इलाका पामीर का है जो 128 साल से विश्वशक्तियों के दबाव के कारण हमसे अलग है। इसके अतिरिक्त चीन सरकार तजिकिस्तान सरकार से सोने के भंडार के बारे में बात कर रही है। चीनी रिपोर्ट के मुताबिक तजिकिस्तान में ही अकेले 145 भंडार हैं। तजिकिस्तान की सरकार ने चीनी कंपनी को इन खानों को विकसित करने और खनन करने का अधिकार दिया है। अधिकारी जो अब इन गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह चीन का पुराना हथियार है और वह सड़क तथा एयरपोर्ट के जरिए तजिकिस्तान की और ज्यादा जमीन पर दावा कर सकता है। लद्दाख और दक्षिण चीन सागर में पड़ोसियों के जमीन पर कब्जा करने की तैयारी में लगा चीन अब मध्य एशिया में भी अपनी विस्तारवादी सोच को बढ़ाने में लग गया है।