काठमांडू । चीन गरीब देशों के भ्रष्ट नेताओं का इस्तेमाल कर उस देश में पैठ बना रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल इसका एक उदाहरण है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नेपाल पीएम केपी शर्मा ओली की संपत्ति में भी पिछले कुछ साल में तेजी से इजाफा हुआ है। इस दौरान उन्होंने विदेशों में भी अपनी संपत्ति बनाई है। इस रिपोर्ट के लेखर रोलांड जैक्कार्ड ने दावा किया है कि ओली का स्विट्जरलैंड के मिराबॉड बैंक की जिनेवा ब्रांच में एक अकाउंट है। इसमें 5.5 मिलियन डॉलर (करीब 41.34 करोड़ रुपए) डिपॉजिट हैं। ओली और पत्नी राधिका शाक्य को सालाना करीब आधा मिलियन डॉलर मिलता है। 
ओली पर भ्रष्टाचार के आरोप
दूसरे कार्यकाल में भी ओली पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ओली ने चीनी कंपनियों को परियोजनाएं देने के लिए सरकार के नियमों को दरकिनार कर दिया। दिसंबर 2018 में डिजिटल एक्शन रूम बनाने के लिए बिना किसी टेंडर के चीनी कंपनी को ठेका दिया गया। जबकि सरकार की स्वामित्व वाली नेपाल दूरसंचार भी इस फैसेलिटी को विकसित करने में समर्थ थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि बाद में की गई जांच से पता चला कि प्रधानमंत्री ओली के राजनीतिक सलाहकार बिष्णु रिमल के बेटे ने वित्तीय लाभ के लिए इस सौदे को अमलीजामा पहनाया था।
कोरोना उपकरणों की खरीद में भी घोटाले का आरोप
जून 2020 में ओली ने कोरोना वायरस से जूझ रहे नेपाल को बचाने के लिए 73 मिलियन यूरो की लागत से चीन से प्रोटेक्टिव उपकरणों की खरीद की थी। जिसमें से ज्यादातर खराब थे और उनकी कीमत भी मार्केट रेट से ज्यादा थी। इस डील को लेकर नेपाल में छात्रों ने ओली सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। इस मामले में नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री और ओली के वरिष्ठ सलाहकारों के खिलाफ जांच भी जारी है।