नई दिल्ली । विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), उन्नत भारत अभियान (यूबीए), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटीडी) और विजनन भारती (विभा) की संयुक्त पहल के तहत ग्रामीण विकास के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस के 40वें स्थापना दिवस के मौके पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित किया गया। इस मौके पर इन प्रौद्योगिकियों को जारी किया गया: गुणवत्ता और स्वच्छ तरीके से शहद निकालने के लिए मधुमक्खी के उन्नत छत्ते, सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर अदरक पेस्ट (अवलेह) बनाने की तकनीकी, सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूर खाद्य और कृषि उत्पादों के लिए डीह्यूमीफ़ाइड ड्रायर, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम और कृषि अपशिष्ट (गेहूं का चोकर, गन्ना बैगास और फलों के छिलके) आधारित जैव-अपक्षरणीय (बायोडिग्रेडेबल) प्लेट, कप और कटलरीज बनाने की तकनीकी, सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम इस अवसर पर मंत्री ने सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस ई-कंपेंडियम और ई-कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया।
डॉ. शेखर सी मांडे (डीजी-सीएसआईआर, सचिव, डीएसआईआर, भारत सरकार), पद्म भूषण विजय पी. भाटकर (अध्यक्ष-राष्ट्रीय संचालन समिति, यूबीए), प्रो. राम गोपाल राव (निदेशक, आआईआई दिल्ली, प्रो. वीरेंद्र के. विजय (राष्ट्रीय संयोजक, यूबीए) और डॉ. रंजना अग्रवाल (निदेशक, सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) वक्ताओं में शामिल रहीं, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों और ग्रामीण विकास के बीच बेहतर साझेदारी लाने पर प्रकाश डाला।
इस कार्यक्रम में सीएसआईआर की ग्रामीण प्रौद्योगिकियों को समाज तक पहुंचाने के मकसद से सुप्रसिद्ध गणमान्य व्यक्तियों, विज्ञान विशेषज्ञों, क्षेत्र विशेषज्ञों, सभी क्षेत्रीय समन्वय संस्थानों, यूबीए के सहभागी संस्थानों, गैर-लाभकारी संगठनों, यूबीए के स्वयंसेवकों, गोद लिए गए गांवों के ग्रामीणों और किसानों समेत विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। कोविड के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में, खास तौर पर उन लोगों के लिए जो लॉकडाउन में अपने पैतृक गांव लौट आए थे, आजीविका के अवसर पैदा करने की त्वरित कार्ययोजना को बनाने पर संयुक्त रूप से काम करने के लिए 28 जुलाई, 2020 को सीएसआईआर में इससे जुड़े एक त्रिपक्षीय समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। सीएसआईआर ने बीते वर्षों में कई उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को विकसित किया है, जिन्हें विकास और आजीविका पैदा करने और सतत विकास लक्ष्यों को पाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में लगाया जा सकता है। अब इन प्रौद्योगिकियों को अब यूबीए के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशनल नेटवर्क और विभा के स्थानीय चैप्टर्स के जरिए समाज के बीच पहुंचाया जाएगा। सीएसआईआर- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड डेवलपमेंट स्टडीज (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) अभी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं, यूबीए, विभा और साझेदारों को संबद्ध करने वाले एक नोडल सीएसआईआर लैब की तरह काम कर रहा है।