2015 में 6 सीटों पर सिमटने वाली NDA के सामने 'मगध' जीतने की चुनौती

 2015 में 6 सीटों पर सिमटने वाली NDA के सामने 'मगध' जीतने की चुनौतीबिहार के मगध क्षेत्र में भाजपा, जेडीयू और आरजेडी में दिलचस्‍प मुकाबला है.
 2015 के विधानसभा चुनाव में 6 सीट जीतने वाली एनडीए (NDA) ने मगध की सभी 26 सीटों को जीतने का दावा किया है तो दूसरी तरफ महागठबंधन के नेताओं ने तेजस्वी के नेतृत्व में 2015 के परिणाम को दुहराने का वादा किया है.

गया. अगले कुछ दिनों में बिहार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है. इससे पहले ही सत्ता और विपक्षी दलों की तरफ से दावे-प्रतिदावे शुरू हो गये हैं. सत्ता के लिहाज से बिहार में मगध का इलाका हरेक राजनीतिक दल और गठबंधन के लिए काफी महत्व रखता है. प्राचीन काल में पटना  और गया का इलाका मगध राज्य के रूप में जाना जाता था, लेकिन वर्तमान समय में बिहार के मगध प्रमंडल में गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानबाद और अरवल यानी पांच जिले हैं. साल 2015 बनाम 2020 की लड़ाई में यह इलाका इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां एनडीए (NDA) को फिर से वापसी करनी है.

साल 2015 के विधानससभा चुनाव में भाजपा 5 सीट एवं हम की एक सीट के साथ एनडीए गठबंधन मात्र 6 सीट पर सिमटकर रह गयी थी. जबकि लोजपा और रालोसपा का खाता भी नहीं खुला था. वहीं, राजद-जदय़ू-कांग्रेस की महागठबंधन ने 20 सीटों पर कब्जा जमाया था.

वीआईपी नेताओं की कर्मस्थली है मगध

मगध की धरती से कई अलग-अलग दलों के वीआईपी नेता आते हैं जो इस बार के चुनाव में भी बड़ी भूमिका में होंगे. इन नेताओं की चर्चा करें तो कृषि मंत्री प्रेम कुमार, शिक्षा मंत्री कृष्णंदन वर्मा, पूर्व सीएम जीतनराम मांझी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र यादव, पूर्व मंत्री रामाधार सिंह, पूर्व मंत्री अवधेश सिंह, पूर्व मंत्री अनिल कुमार, पूर्व मंत्री विनोद यादव, अभय कुशवाहा, कौशल यादव जैसे दिगग्ज नेताओं की साख इस बार भी दाव पर होगी
 

NDA का सभी सीट जीतने का दावा

2015 के बिहार विधाससभा चुनाव में एनडीए भले ही 26 में से सिर्फ 6 सीट ला पायी हो पर 2020 में एनडीए के नेता सभी सीट जीतने का दावा कर रहे हैं. गया नगर से 1990 से लगातार चुनाव जीतने वाले भाजपा के विधायक और बिहार सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि 2015 के मुकाबले परिस्थियां बदल चुकी हैं. विश्व के लोकप्रिय नेता नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के डबल इंजन की सरकार इस चुनाव को लीड कर रही है. इसके साथ ही रामविलास पासवान और जीतनराम मांझी जैसे दलित चेहरे उनके साथ हैं, इसलिए 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह ही विधानससभा चुनाव का भी परिणाम भी 100 फीसदी उनके पक्ष में होगा. कुमार की तरह ही युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष और टिकारी के विधायक अभय कुशवाहा ने कहा कि पूरे बिहार में एनडीए 200 से ज्यादा सीट के साथ नीतीश कुमार के नेतृत्व में फिर से सरकार बनाने जा रही है.

महागठबंधन का पलटवार

एनडीए नेताओं के 100 फीसदी रिजल्ट के दावों को महागठबंधन के नेता मुंगेरीलाल का हसीन सपना बता रहे हैं. राजद के प्रदेश प्रवक्ता सह बोधगया के विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि 2015 में महागठबंधन ने नीतीश की अगुवाई में गरीब, मजदूर, युवा, किसान, पलायन, बेरोजगारी एवं आरक्षण के मुद्दे पर चुनाव मैदान में उतरा था और राज्य की जनता ने उन्हें अपार समर्थन दिया था. नीतीश कुमार ने जनता के मेंडेंट को धता बताते हुए भाजपा के साथ हाथ मिला लिया और जनता की उन मुद्दों के लिए कोई काम नहीं किया. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन 2015 से भी ज्यादा सीटें लायेगी. वजीरगंज से कांग्रेस विधायक ने कहा कि जदयू के जाने के बाद रालोसपा और वामपंथी पार्टी उनके साथ जुड़ी हैं, इसलिए महागठबंधन की ताकत पहले से ज्यादा बढी है. गया की यह धरती क्रांतिकारी धरती है, जहां जगदेव बाबू और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने सत्ता के खिलाफ शंखनाद किया था. इस चुनाव में राजद के साथ ही कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां सहयोग कर रही हैं और महागठबंधन 2015 के चुनाव परिणाम को मगध क्षेत्र में दुहराने में जरूर कामयाब होगी.