नई दिल्ली । मध्यप्रदेश का शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न मदों का रुका हुआ लगभग 800 करोड़ रु की राशि को केन्द्र से शीघ्र जारी करवायं। आज यहां मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ’निशंक’ से उनकी मुलाकात के दौरान कही। केन्द्रीय मंत्री से उनके निवास स्थान पर मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री ने यू.जी.सी. के सातवें वेतनमान की 50 प्रतिशत राशि की केन्द्र से प्रतिपूर्ति की मांग की। श्री जीतू पटवारी ने केन्द्र सरकार से एकमुश्त 400 करोड़ की अनुदान राशि की मांग की। उन्होंने बताया कि डाॅ. हरिसिंह गौऱ विश्वविद्यालय को केन्द्रीय  विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त होने के उपरांत राज्य शासन ने सागर संभाग में महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय छतरपुर की स्थापना सन् 2011 में की। सागर विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय के उन्नयन हो जाने के बाद राज्य शासन की लगभग 400 करोड़ की परिसंम्पत्तियां भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दी गयी थी। केन्द्रीय विश्वविद्यालय को हस्तांतरित परिसम्पत्तियांे का लगभग 400 करोड़ का एकमुश्त भुगतान केन्द्र सरकार में काफी समय से लम्बित है। उन्होंने आग्रह किया कि इसको शीघ्र पारित करवाया जाय। 
         नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 पर केन्द्रीय मंत्री से चर्चा करते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कई सुझाव के साथ-साथ व्यापक परामर्श किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति मध्यप्रदेश के हितों के साथ-साथ अनुदान और कई मदों में रुकी हुई राशि को शीघ्र जारी करने के साथ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री को मध्यप्रदेश आने का निमंत्रण दिया। 
         नवीन शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रस्तावित भारतीय मुक्त कला संस्था को इंदौर में स्थापित करने का अनुरोध किया। साथ ही विश्वविद्यालय में अलग-अलग विषयों के लिए विश्व स्तरीय शोध केन्द्र सेन्टर फार एक्सिलेंस को भी मध्यप्रदेश में खोलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार जमीन एवं अन्य संसाधन उपलब्ध करायेगी। श्री पटवारी ने हिन्दी भाषी विद्यार्थियों के लिए ैूंलंउ के तहत अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के समान ही हिन्दी भाषी विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सामग्री की व्यवस्था करने की मांग की। श्री जीतू पटवारी ने जनजातीय एवं सुदूर इलाकों में स्थित महाविद्यालयों को बन्द नहीं करने की मांग की और हाइब्रिड माॅडल अपनाये जाने की वकालत की। नवीन शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा प्राधिकरण प्रस्तावित होने के उपरांत श्री पटवारी ने राज्यों में निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही उच्च शिक्षा के नियमन में राज्य सरकार की भूमिका को भी समुचित रूप से शामिल किये जाने की मांग की है। राष्ट्रीय शिक्षा परिषद अधिनियम 2019 के अनुसार प्रदेश में शिक्षण संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने के पहले परिषद द्वारा अभिमत के लिए राज्य शासन से उनका मत लिये जाने को आवश्यक बताया।