नई दिल्ली । तमाम कोशिशों के बावजूद पंजाब में कांग्रेस की चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। किसान आंदोलन और पहला दलित मुख्यमंत्री की बदौलत पार्टी एक बार फिर चुनाव जीतने की उम्मीद कर रही है। पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नई पार्टी बनाने और भाजपा से गठबंधन के संकेत देकर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। क्योंकि, ऐसी स्थिति में पंजाब में चतुष्कोणीय संघर्ष तय है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) लगातार खुद को मजबूत कर रही है। अकाली दल भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। ऐसे में भाजपा अमरिंदर सिंह की नई पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरती है, तो कांग्रेस के लिए बहुत ज्यादा जगह नहीं बचेगी। क्योंकि, पिछले चुनाव में पार्टी को सिख मतदाताओं के साथ हिंदू मतदाताओं ने भी बड़े पैमाने पर वोट दिया था। सवर्ण हिंदू मतदाता भाजपा-अकाली गठबंधन को वोट करते रहे हैं। पर पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी के मुकाबले हिंदू मतदाताओं ने कांग्रेस को तरजीह दी थी। कैप्टन की राष्ट्रवादी छवि ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी। ऐसे में भाजपा को कैप्टन का सहारा मिलता है, तो हिंदू मतदाता कांग्रेस से छिटक सकते हैं। पंजाब में करीब 39 फीसदी हिंदू मतदाता हैं। हिंदू मतदाता संभावित भाजपा कैप्टन गठबंधन की तरफ झुकते हैं, तो इससे शहरी क्षेत्रों में कांग्रेस को भारी नुकसान होगा। क्योंकि, 45 शहरी सीट हिंदू बहुसंख्यक हैं या हार-जीत तय करते हैं। वहीं, सवर्ण सिख मतदाताओं के वोट के लिए कांग्रेस, आप और अकाली दल के बीच मुकाबला है। ऐसे में चुनाव में दलित सिख मतदाताओं की भूमिका अहम हो जाएगी। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू की छवि हिंदू मतदाताओं में बहुत अच्छी नहीं है। कैप्टन लगातार सिद्धू को पाकिस्तान परस्त करार देते रहे हैं। इस वजह से भी हिंदू मतदाता कांग्रेस से दूर हो सकते हैं। कांग्रेस इस नुकसान को दलित सिख वोट से पूरा करना चाहती है, पर वह इस लक्ष्य में कितनी सफल होगी, यह चुनाव परिणाम तय करेंगे। यह पहली बार नहीं है जब कैप्टन ने कांग्रेस से अलग होकर अलग पार्टी बनाई है। 1984 में स्वर्ण मंदिर पर हमले के विरोध में वह कांग्रेस छोड़कर अकाली दल में शामिल हो गए थे। पर 1992 में उन्होंने अकाली दल छोड़कर अपनी नई पार्टी अकाली दल (पंथिक) बनाई थी। बाद में 1997 में पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया। इसके बाद कैप्टन कांग्रेस में रहे। हालांकि, 2017 के चुनाव से पहले फ्री हैंड नहीं मिलने पर भी पार्टी छोड़नी की धमकी दी थी।