ये तो सभी जानते हैं कि कुत्तों में सूंघने (Sense of Smell) की अद्भुत क्षमता होती है, लेकिन इसका उपयोग क्या Covid-19 के मामले में हो सकता है? अगर हां तो कैसे? वैज्ञानिक, खास तौर पर कीट विज्ञानी (Entomologist) इस बात का पता लगाने के लिए प्रयोग कर रहे हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इंसान का वफादार समझा जाने वाला यह जीव इस बार भी बहुत काम आने वाला है. वैज्ञानिकों का मानना है कि सूंघने की क्षमता इंसान से 10,000 गुना ज़्यादा होने के कारण कुत्तों को ट्रेंड किया जा सकता है कि वो कोरोना वायरस (Corona Virus) का अंदाज़ा दें. सुनने में वाकई बहुत अजीब और अविश्वसनीय भी लग सकता है, लेकिन दुनिया भर में ऐसी तैयारी चल रही है. यूके में सरकार के फंड से यह अध्ययन किया जा रहा है कि कुत्तों में क्या कोविड 19 को डिटेक्ट करने की क्षमता है? काफी उम्मीद के बाद कुत्तों को ट्रेंड भी किया जाने लगा है. यह तरकीब कारगर हुई तो स्कूलों, एयरपोर्टों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 'कोरोना के चौकीदार' के तौर पर कुत्ते तैनात किए जा सकते हैं. खबरों की मानें तो ऐसी ही एक स्टडी अमेरिका के पैनसिलवेनिया में भी चल रही है.

कैसे मदद कर सकते हैं कुत्ते?

दुनिया भर में 11.5 लाख से ज़्यादा जानें ले चुके कोरोना वायरस के खिलाफ वैज्ञानिक गंध के कॉंसेप्ट पर काम कर रहे हैं. अस्ल में, जब कोई व्यक्ति किसी रोग से ग्रस्त होता है, तो अपने शरीर से बीमारी के अंतर से एक अलग किस्म की गंध पैदा करता है. पहले भी मलेरिया, संक्रामक बैक्टीरिया और कुछ किस्मों के कैंसर के मामलों में एयरबोर्न केमिकलों को पहचानने में कुत्तों को सक्षम पाया जा चुका है. लंदन स्कूल ऑफ हाईजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के विशेषज्ञ इस दिशा में काम कर रहे हैं क्योंकि कुछ स्टडीज़ में सकारात्मक नतीजे पाए जा चुके हैं. जून में फ्रांस में एक स्टडी हुई थी, जिसमें पीसीआर टेस्ट के कुछ ह्यूमन सैंपल लिये गए थे और देखा गया कि खास तौर से बगल से बहने वाले पसीने की दुर्गंध को कुत्तों ने पहचानने में सकारात्मकता दिखाई. इसी तरह, जुलाई में जर्मनी में भी ऐसी ही एक स्टडी छपी, जिसमें कहा गया कि कोविड मरीज़ों और कंट्रोल्ड माहौल में रखे गए लोगों के गंध में फर्क करने में कुत्ते सक्षम रहे, वो भी एक हफ्ते की ट्रेनिंग में ही यह कमाल हुआ.

क्यों हो रही है ये स्टडी?

अगर यह तरकीब वाकई कारगर सिद्ध हुई तो इससे कुछ बड़े फायदे संभव हैं. एक तो एंटिजन टेस्ट में नाक के ज़रिये नली डालकर स्वाब नमूना लेने में मरीज़ को तकलीफ होती है, यह हेल्थ स्टाफ के लिए भी जोखिम भरा होता है और फिर रिज़ल्ट आने में समय भी लगता है. दूसरी तरफ, हर सार्वजनिक स्थान पर टेस्टिंग सुविधा मुहैया कराना भी एक चुनौती रही है. ऐसे में, अगर कुत्ते बगैर स्वाब नमूनों के रोगी को पहचान सकते हैं, तो यह बहुत बड़ी राहत हो सकती है.

क्या यह कुत्तों का मिसयूज़ है?

जी नहीं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कुत्तों के लिए खेल की तरह है. मिसाल के तौर पर, एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने डिटेक्शन डॉग ट्रेनिंग सिस्टम डिवाइस का इस्तेमाल किया. इसमें अलग अलग नमूनों के बीच में रैंडमली एक कोविड पॉज़ीटिव सैंपल रखा गया और सही पहचानने पर कुत्तों को पुरस्कार के तौर पर भोजन दिया गया तो कुत्तों ने बहुत कम समय में इस तरह ट्रेंड होने में दिलचस्पी दिखाई.

दुनिया भर में कोविड ट्रेंड कुत्ते?

कोरोना वायरस को सूंघने के लिए ट्रेंड कुत्तों का इस्तेमाल फिनलैंड सरकार के एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हेलसिंकी-वैंटा एयरपोर्ट पर किया जा रहा है. जबकि कुत्तों के कोविड को सूंघ लेने की क्षमता के बारे में जब बहुत कुछ पता नहीं है, तब भी यूएई के कुछ हवाई अड्डों पर कुत्तों को स्कैनर की तरह यूज़ किया जा रहा है.

क्या है इस स्टडी में चुनौती?

कुछ सवालों के जवाब अभी मिलने बाकी हैं, जैसे कोरोना की कितनी स्ट्रॉंग गंध कुत्ते पहचान सकते हैं? क्या वो एयरपोर्ट जितनी भीड़ में हर व्यक्ति की गंध को भांप सकते हैं? और क्या वो परफ्यूम या सेंट की गंध और पसीने की गंध को अलग अलग पहचान पा रहे हैं? टाइम की रिपोर्ट की मानें तो अभी नहीं पता है कि कोविड 19 संक्रमण किस स्तर तक होने पर कुत्तों को पहचानने लायक गंध मिल सकती है. हालांकि स्टडीज़ कह रही हैं कि एसिम्प्टोमैटिक मरीज़ों को पहचानने के लिए कुत्तों की इस क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकता है. ये भी एक सवाल अभी खड़ा हुआ है कि कोविड 19 के वायरस के अलावा ये ट्रेंड कुत्ते कहीं किसी और तरह के वायरल इन्फेक्शन को भी तो डिटेक्ट नहीं कर रहे? इन तमाम चुनौतियों के बावजूद शोधकर्ताओं को इस प्रोजेक्ट से काफी उम्मीदें हैं क्योंकि दुनिया भर में इस तरह की स्टडीज़ में काफी सकारात्मक परिणाम मिले हैं. और पुख्ता नतीजे मिलते ही उम्मीद है कि छह महीने के भीतर दुनिया में ट्रेंड कुत्ते कोविड स्कैनर के तौर पर तैनात मिलेंगे.