नई दिल्ली । रक्तदान यानी ब्लड डोनेशन करने से न सिर्फ आप खून देकर दूसरों की जान बचाते हैं बल्कि इससे आपकी सेहत को भी कई तरह से फायदा होता है। इससे न सिर्फ आपका तनाव कम होता है, आप भावनात्मक रुप से बेहतर महसूस करते हैं और नकारात्मक सोच भी दूर होती है बल्कि रक्तदान करने से दिल से जुड़ी बीमारियों और हार्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाता है। आमतौर पर लोग डरते हैं कि रक्तदान करने से आदमी कमजोर हो सकता है, लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि रक्तदान करने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता, बल्कि इससे हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का खतरा बेहद कम हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार  18 से 55 वर्ष तक का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इससे किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है। रक्तदान से शरीर में रक्त की जो कमी होती है उसे शरीर कुछ ही घंटों में पूरा कर लेता है। हालांकि रक्त के लाल कण बनने में 3 से 6 महीने लग जाते हैं। इसलिए 6 महीने में एक बार ही रक्तदान करना चाहिए। नियमित रक्दान करने वालों को हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा बेहद कम रहता है। रक्तदान से कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है। खासकर पुरुषों के नियमित रक्तदान करने से उन्हें रक्त में आयरन की मात्रा कम करने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। साल 2013 की एक स्टडी में यह बात सामने आयी थी कि अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से ब्लड डोनेशन करता है तो उसके शरीर में टोटल कोलेस्ट्रॉल और लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन कलेस्ट्रॉल का लेवल भी कम हो जाता है जिससे कार्डियोवस्क्युलर डिजीज यानी दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। दरअसल, लगातार ब्लड डोनेट करते रहने से खून का गाढ़ापन भी कम होता है जिससे दिल से जुड़ी बीमारियां नहीं होती।