पहली बार डॉक्टर कोर्ट में हुए पेश, कहा- महाराज का 3 साल से चल रहा था डिप्रेशन का इलाज

भय्यू महाराज की मौत के मामले में पहली बार गुरुवार को महाराज के डॉक्टर पवन राठी कोर्ट में पेश हुए। डॉक्टर ने मामले में चौंकाने वाली बात कही है। उन्होंने बताया, एक बार महाराज से विवाद होने पर आयुषी ने हाथ की नस काट ली थी। वे वहां मौजूद थे। उन्होंने ही आयुषी की ड्रेसिंग की थी। डॉक्टर के अनुसार वे महाराज का तीन साल से डिप्रेशन का इलाज कर रहे थे। वहीं, तीन अन्य सेवादार योगेश चौहान, गीता और शेखर के सामने नहीं आने का मामला भी कोर्ट में उठा।

शरद के वकील धर्मेंद्र गुर्जर सहित अन्य आरोपियों के वकीलों ने डॉ. राठी से क्रॉस एक्जामिनेशन किया। जब वकील ने डॉक्टर से सवाल किया कि क्या आपको कभी भय्यू महाराज ने यह कहा कि किसी सेवादार के कारण वे डिप्रेशन में हैं? इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा कभी महाराज ने उन्हें नहीं कहा था।

जब उसने पूछा गया कि क्या इलाज के लिए आप महाराज के घर जाते थे? इस पर डॉक्टर ने हां में जवाब दिया। उसने सवाल किया गया कि आपको सिंपल ड्रेसिंग करना आती है? उन्होंने हां में जवाब दिया। इसके बाद उसने पूछा गया कि क्या आपके सामने आयुषी और महाराज के बीच विवाद हुआ था, जिसमें आयुषी ने हाथ की नस काट ली थी, तब आपने ड्रेसिंग की थी? इस पर उन्होंने कहा कि हां, ऐसा हुआ था।

आयुषी को बताया था- कब, कौन सी दवा देना है

वकील का कहना है, आयुषी अब तक इस बात को छिपाना चाह रही थी। डॉक्टर ने जो आंखों से देखा था, उसे उन्होंने कोर्ट में बताया। डॉ. राठी महाराज के डिप्रेशन संबंधी बीमारी का इलाज कर रहे थे। उनसे जब पूछा गया, आयुषी को कभी दवाई देने संबंधी निर्देश दिए, तो उन्होंने कहा कि जब महाराज मेदांता में भर्ती थे, तो मैंने आयुषी को बताया था कि महाराज को कौन सी दवाई कब देना है।

गीता, योगेश चौहान को आयुषी ने नौकरी ने निकाल दिया था। एक शेखर नाम का व्यक्ति था, जिसे आरोपी बताया जा रहा था। उसे पुलिस ने आज तक आरोपी नहीं बनाया है, वह कहां है, यह भी किसी को नहीं पता। प्रकरण के कई लोगों को गायब कर दिया गया है। सूत्रों की मानें, तो योगेश महाराज के सबसे पुराने सेवादारों में से एक था। वहीं, गीता और शेखर भी लंबे समय से महाराज की सेवा कर रहे थे, लेकिन घटना के बाद से ये अब तक सामने नहीं आए। वहीं, गीता भय्यू महाराज के साथ ही उनकी मां का भी दवाई संबंधित चीजें देखती थी।