इन्दौर । विश्व में ऐसा कोई दर्शन नहीं है, जो भारत जैसा हो। दुनिया के किसी देश में अद्वैत जैसा दर्शन है ही नहीं। सेवा के कई स्वरूप हो सकते हैं लेकिन सेवा चाहे देश की हो, धर्म की हो या मानव की, सेवा सेवा ही होती है। चिकित्सा का मूल लक्ष्य पीड़ितों को नया जीवन देने का है। पृथ्वी पर भगवान के बाद दूसरा स्थान डॉक्टर्स का माना गया है। एक श्रेष्ठ डॉक्टर अपने ज्ञान से मरीजों का रोग दूर करते हैं, लेकिन अच्छे डॉक्टर के साथ अच्छा इंसान होना भी जरूरी है। पीड़ित मानवता की सेवा भी किसी पुण्य और तीर्थ से कम नहीं हो सकती। 
पंचकुईया स्थित परमानंद हास्पिटल परिसर में चल रहे अनंतेश्वर महादेव परिवार के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं अपने 63वें संन्यास जयंती महोत्सव के प्रसंग पर परमानंद हॉस्प‍िटल के सेवाभावी चिकित्सकों का सम्मान करते हुए युगपुरूष स्वामी परमानंद गिरी ने उक्त विचार रखे। हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी ज्योतिर्मयानंद, ओंकारेश्वर की साध्वी साक्षी दीदी, साध्वी चैतन्य सिंधु, गोविंद भाई सोनेजा एवं अन्य संत-विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में ट्रस्ट की अध्यक्ष जान्हवी पवन ठाकुर,  सचिव तुलसी शादीजा, परमानंद हॉस्प‍िटल के डायरेक्टर डॉ. जी.डी. नागर की मौजूदगी में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. माधुरी तायड़े एवं डॉ. चंचल जैन, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जे.एन. अग्रवाल, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुधीर हक्सर, डॉ. श्रीकांत जोग, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जी.के. शर्मा एवं डॉ. तनूजा काटे, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष खंडेलवाल एवं डॉ. सुभाष जैन, पैथालॉजिस्ट डॉ. दीपक मूलचंदानी तथा टेक्नीशियन मुरलीधर पालीवाल, प्रतापसिंह यादव, चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. कैलाश भाटिया एवं डॉ. पंकज परमार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जगदीश महाजन, डॉ. विजय हवलदार एवं डॉ. अजय अग्रवाल, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.के. महाजन, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिला कोठारी के साथ ही समाजसेवी हीरालाल जैन, कुसुम शर्मा, श्रीराम पंजूमल ठाकुर सहित अस्पताल के सेवाभावी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया। युगपुरूष स्वामी परमानंद ने सबको प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह के साथ पुष्पमाला पहनाई। संचालन किया बौद्धिक विकास केंद्र की प्राचार्य डॉ. अनिता शर्मा ने। 
स्वामी परमानंदजी ने कहा कि उपचार के दौरान डॉक्टर्स कई तरह के परीक्षण और जांच करते हैं जिनसे प्रारंभ में तो कष्ट होता है लेकिन बाद में रोग नष्ट हो जाता है। डॉक्टर जो कुछ करते हैं, हमारी भलाई के लिए करते हैं। उनका लक्ष्य हमें नया जीवन देने का होता है, तकलीफ देने का नहीं। कई डॉक्टर ऐसे होते हैं, जिनके सामने आते ही आधी बीमारी दूर हो जाती है। अपने ज्ञान से लोगों को नया जीवन देना बहुत बड़ी सेवा है, लेकिन अच्छे डॉक्टर के साथ अच्छा इंसान भी होना चाहिए। पीड़ित लोगों के दुख-दर्द को दूर कर उनके आंसू पोंछने से बड़ा कोई धर्म और पुण्य नहीं हो सकता। यह प्रसन्नता की बात है कि शादीजा परिवार की चार पीढ़ियां इस हॉस्प‍िटल और बौद्धिक विकास केंद्र की सेवा में तत्पर है। 
:: आज के कार्यक्रम :: 
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस शुक्रवार 10 मई को सुबह 9 बजे से आचार्य पं. अजय शास्त्री के निर्देशन में वेद पाठ, मंडल पूजन एवं प्रतिमाओं के फलाधिवास की शास्त्रोक्त प्रक्रियाएं संपन्न होगी। सभी प्रतिमाओं को पवित्र नदियों एवं तीर्थों के जल से स्नान कराया जाएगा। फलों के रस से अभिषेक भी होगा। शनिवार 11 मई को गंगा सप्तमी पर पुष्य नक्षत्र में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। शाम 5.30 बजे स्वामी परमानंदजी के प्रवचन के बाद प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की पूर्णाहुति एवं देव दर्शन के पश्चात महाप्रसादी का आयोजन होगा। स्वामीजी के प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8 से 9 तथा सांय 7 से 9 बजे तक होंगे।