बहादुर सिंह ने 25 साल तक भारतीय एथलेटिक्स के मुख्य कोच पद पर रहने के बाद इस्तीफा दे दिया है। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के अनुसार बहादुर सिंह को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के साथ अनुबंध समाप्त होने के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। आयु नियमों के आधार पर उनके करार को आगे नहीं बढ़ाया गया है। एएफआई ने उनके कार्यकाल की प्रशंसा की है। 
एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक (1978, 1982) जीतने वाले 74 साल के इस कोच का अनुबंध 30 जून को समाप्त हुआ।  वहीं खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिविरों में कोचों की ऊपरी आयु सीमा 70 तक रखने के अपने दिशानिर्देशों के अनुसार ही इसे आगे नहीं बढ़ाया है। भारत में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्य कोचों में एक बहादुर सिंह का कार्यकाल फरवरी 1995 में शुरू हुआ था।
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता और फिर मुख्य कोच के तौर पर उनके योगदान की सराहना की। एएफआई के अध्यक्ष आदिले सुमरिवाला ने कहा, ‘‘ जब हम वैश्विक मंच पर अपनी यात्रा देखते है तो हम भारतीय एथलेटिक्स में कोच बहादुर के अमूल्य योगदान को हमेशा याद करेंगे। उन्होंने 70 और 80 के दशक के शुरुआती दौर में गोला फेंक खिलाड़ी के रूप में और फिर फरवरी 1995 से मुख्य कोच के रूप में योगदान दिया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम ओलंपिक खेलों में टीम के साथ उन्हें देखना चाहते थे पर कोविड-19 महामारी के कारण टोक्यो ओलंपिक स्थगित करने पड़े हालांकि हम प्रशिक्षण और कोचिंग की योजना बनाने के उनके अनुभवों का लाभ उठाएंगे।’’
उनकी देखरेख में ही भारत ने 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के एथलेटिक्स में दो स्वर्ण सहित 12 पदक हासिल किये थे। उनके रहते भारत ने जकार्ता 2018 एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया ट्रैक और फील्ड प्रतियोगिता आठ स्वर्ण और नौ रजत सहित 20 पदक जीते। वहीं एएफआई योजना और कोचिंग समिति के अध्यक्ष ललित भनोट ने कहा, ‘‘ एशियाई खेलों में देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ने खेल समुदाय में यह विश्वास पैदा किया कि थोड़ी अधिक योजना और प्रयास के साथ भारत अपने स्तर को ऊंचा उठा सकता है और वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ सकता है। बहादुर जी ने इस उत्थान में अहम भूमिका निभायी है।’’