सार

  • पूर्व सीएम बादल के कहने पर जारी किया था आरएसएस के विरोध का पत्र
  • तत्कालीन जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने कहा था, ऊपर से आया है फरमान
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विस्तार
अयोध्या में श्री राम मंदिर शिलान्यास में हिस्सा लेने वाले श्री पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह ने नया और बड़ा खुलासा किया है। ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि 2004 में वह श्री अकाल तख्त साहिब से आरएसएस के विरुद्ध जारी फरमान पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहते थे, लेकिन तत्कालीन जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती ने यह कहकर उनसे हस्ताक्षर करवाए थे कि यह आदेश प्रकाश सिंह बादल की तरफ से आया है।

इस खुलासे से एक बार फिर साफ हो गया है कि बादल परिवार श्री अकाल तख्त साहिब से मनमर्जी के आदेश जारी करवाता रहा है। पहले भी डेरा मुखी को श्री अकाल तख्त साहब से माफी दिलाने में बादल परिवार की ही मनमर्जी चली थी। यह खुलासा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रकाश सिंह बादल आरएसएस व भाजपा के साथ गहरी दोस्ती निभाते आए हैं और उनके बलबूते पर पंजाब में छह बार सत्ता हासिल कर चुके हैं।
यह लिखा था श्री अकाल तख्त साहब से जारी पत्र में...
23 जुलाई 2004 को श्री अकाल तख्त से आदेश जारी हुआ था, जिसमें लिखा गया था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पहले प्रकाश पर्व की चौथी शताब्दी समागमों के दौरान आरएसएस सिख कौम से झूठी हमदर्दी बनाकर शातिर चाल चल रही है। सिख कौम को कमजोर करने और घुसपैठ करने के लिए आरएसएस सर्व सांझी गुरबाणी यात्रा को शुरू करने जा रही है।

आरएसएस सिख पंथ विरोधी है और इसके संगठन राष्ट्रीय सिख संगत की तरफ से पंथ के खिलाफ गतिविधियां की जा रही हैं। आरएसएस द्वारा ऐसा भी प्रचार किया जा रहा है कि उनको सिख पंथ के जत्थेदारों की हिमायत मिल चुकी है। श्री अकाल तख्त की तरफ से सिख विरोधी किसी भी संस्था को कोई हिमायत नहीं दी गई है और न ही दी जाएगी।

सिख संगत से कहा जाता है कि आरएसएस व राष्ट्रीय सिख संगत को किसी प्रकार का सहयोग न दिया जाए। इस पत्र पर जत्थेदार जोगिंदर सिंह वेदांती, जत्थेदार बलवंत सिंह तख्त दमदमा साहिब, ज्ञानी गुरबचन सिंह ग्रंथी श्री दरबार साहिब, ज्ञानी इकबाल सिंह जत्थेदार पटना साहिब और त्रिलोचन सिंह जत्थेदार श्री केसगढ़ साहिब के हस्ताक्षर थे।
विवादों में हैं ज्ञानी इकबाल सिंह
अयोध्या में श्री राम मंदिर के शिलान्यास के मौके पर ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा था कि सिख गुरु लव कुश के वंशज हैं। चंडीगढ़ में गुरुद्वारा श्री कलगीधर निवास में एसजीपीसी की अंतरिम कमेटी की मीटिंग में जत्थेदार के इस बयान की निंदा की गई। एसजीपीसी के प्रधान गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि इतिहास को बिगाड़ना पूर्व जत्थेदार को शोभा नहीं देता।

शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने उन पर सिख मर्यादा का उल्लंघन करने और इतिहास की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की कि श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह उनके खिलाफ कार्रवाई करें और उनको तलब कर उनसे इसके सुबूत मांगे। सरना ने कहा कि जत्थेदार इकबाल सिंह को बताना चाहिए कि इतिहास की किस किताब में लिखा है कि गुरु साहिब लव-कुश के वंशज हैं।

दशम ग्रंथ में जिक्र है कि हमारे गुरु लव कुश के वंशज थे
ज्ञानी इकबाल सिंह ने कहा कि वह अब भी श्री पटना साहब के जत्थेदार हैं। उनको हटाया गया, लेकिन मामला अदालत में है। अदालत के फैसले तक वह अपने नाम के आगे वर्तमान जत्थेदार लगाते रहेंगे। उन्होंने जो बयान अयोध्या में दिया था कि सिख गुरु लव कुश के वंशज हैं, वह आज भी उस पर कायम है क्योंकि यह सब दशम ग्रंथ में अर्जित है, जिसकी रचना श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने की थी।