इन्दौर । भगवान श्रीकृष्ण ने पांच वर्ष की आयु में पहली बार अपने बाल ग्वालों के साथ गाय चराने के लिए जंगल में जाने का निर्णय लिया था। वर्तमान में गौशालाओं की स्थिति को ये बाल ग्वाल ही संभाल रहे हैं। मां पराम्बा गौभक्त मंडल की ओर से आज शहर के आसपास की आधा दर्जन गौशालाओं के ग्वालों का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया बल्कि उनका पूजन भी किया गया।
मां पराम्बा गौभक्त मंडल की ओर से संयोजक योगेश होलानी, सिकंदरी पटेल, रतनसिंह, घनश्याम यादव एवं द्वारकेश दुबे सहित करीब 25 गौसेवकों ने ग्राम सिकंदरी की कृष्ण-बलदाऊ गौशाला, गंगाजल खेड़ी गौशाला, देवड़ाखेड़ी अंचल हनुमान गोविंद गौधाम शबरी गौशाला, खजूरिया रेशम केंद्र स्थित उत्सव गौशाला, रेशम केंद्र स्थित गोकुलम गौशाला और हातोद गौशाला पहुंचकर वहां कार्यरत करीब 40 ग्वालों को तिलक लगाकर, शाल एवं श्रीफल भेंट किए। संभवतः ग्वालों के सम्मान का यह पहला आयोजन था। इससे अभिभूत ग्वालों ने सभी गौसेवकों को आशीर्वाद दिए। इस अवसर पर गोकुलम गौशाला रेशम केंद्र की गायों को ठंड के दिनों में दिए जाने वाले लड्डू भी परोसे। इस अवसर पर गौसेवक राजेंद्र भंडारी, सुभाष जायसवाल, पवन पांडे, राजू भाई सराफा, जानू भंडारी, दरबार सिंह, अरविंद सिंह, निर्भयसिंह, नरेंद्र सिंह एवं दिलीप सिंह सहित बड़ी संख्या में गौभक्त सोशल डिस्टेंस, मास्क एवं सेनेटाइजर का प्रयोग करते हुए शामिल थे।