नई दिल्ली । शीर्ष ई-कॉमर्स कंपनी ऐमजॉन ने रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हो रही डील में टांग फंसा दी जिसको लेकर  फ्यूचर ग्रुप के प्रमुख किशोर बियाणी का दर्द आखिर छलक ही गया। हालांकि उन्हें पूरी उम्मीद है कि 3.4 अरब डॉलर के इस सौदे को जल्दी ही जरूरी रेग्युलेटरी एप्रूवल मिल जाएगा। फ्यूचर रीटेल ने आशंका जताई है कि अगर यह सौदा नहीं हुआ तो कंपनी बंद हो सकती है और 29,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ सकती है। कंपनी के 1,700 से अधिक आउटलेट कोविड-19 महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। फ्यूचर ने अपना रीटेल और होलसेल कारोबार मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने के लिए पिछले साल अगस्त में एक डील की थी। तबसे फ्यूचर और ऐमजॉन के बीच विवाद चल रहा है। अमेरिकी कंपनी ऐमजॉन का दावा है कि यह डील उसके फ्यूचर के साथ पहले से चले आ रहे कॉन्ट्रैक्स का उल्लंघन है। दिसंबर में अदालत ने फ्यूचर के अनुरोध को खारिज कर दिया था। कंपनी ने ऐमजॉन को इस मामले में हस्तक्षेप करने से रोकने की अपील की थी।
फ्यूचर ग्रुप के फाउंडर और सीईओ बियाणी ने कहा, 'कोर्ट ने पहले ही साफ तक दिया है कि हर इंस्टीट्यूशन का इस पर अपना नजरिया हो सकता है। इसलिए देरी का कोई कारण नहीं है।' ऐमजॉन ने बियाणी के बयान पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। रिलायंस ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। कई महीनों में इस डील की समीक्षा कर रहे बाजार नियामक सेबी ने भी इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। भारत के रीटेल किंग कहे जाने वाले बियाणी ने कहा, 'हम कुछ हद तक बिजनस को पटरी पर ले आए हैं लेकिन इसमें कई चुनौतियां हैं।' रिलायंस, ऐमजॉन और फ्यूचर के बीच चल रहे इस विवाद का हल काफी हद तक भारत के रीटेल सेक्टर का भविष्य निर्धारित करेगा। इससे पता चलेगा कि देश के ग्रॉसरी मार्केट में किसका सिक्का भारी होगा। 2024 तक भारत के ग्रॉसरी मार्केट के 740 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। बियाणी ने कहा कि ऐमजॉन से विवाद के बावजूद उनकी उनकी अमेरिकी कंपनी के साथ कारोबारी रिश्ते बदलने की कोई मंशा नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर कनफ्यूज हैं कि इस डील को रोककर ऐमजॉन क्या हासिल करना चाहती है। उन्होंने कहा, 'मैं निराश हूं। वे क्या चाहते हैं? क्या वे चाहते हैं कि कर्मचारियों को परेशानी हो, बिजनेस बंद हो जाए।'