बिलासपुर ।सभी को मालूम है कि हमें सकारात्मक सोचना चाहिए। फिर भी हमारे अंदर सकारात्मक व व्यथ दोनों प्रकार के विचार चलते हैं। सकारात्मक व व्यर्थ विचार को रचने वाले रचता हम स्वयं हैं। हमारे सकारात्मक विचारों में दृढ़ता ही हमें समर्थ बना देती है। दृढ़ता सफलता की चाबी है। व्यर्थ विचार हमें बार-बार नीचे ले जाते हैं। छोटी-छोटी बातों में स्वयं से निराश हो जाते हैं। व्यर्थ सोचने वालों के मन की चाहना व मन के इच्छाएं बहुत बड़ी होती है। क्योंकि व्यर्थ विचारों की गति फास्ट होती है। इसलिए बहुत बड़ी-बड़ी बातें सोचते हैं, लेकिन समर्थ न होने कारण सफल नहीं हो पाते हैं। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थानीय शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में २३ तक प्रात: ७.३० से ८.३० बजे तक छ: दिवसीय स्वस्थ जीवन के लिए योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के छठवें दिन सेवाकेन्द्र संचालिका बी के स्वाति ने कहा कि जिनके विचारों में दृढ़ता अर्थात समर्थता होती है, वह सदा जो सोचेंगे वह करेंगे। सोचना और करना दोनों समान होगा। सदा धैर्यवत विचारों की गति से सफलता को प्राप्त करते हैं। व्यर्थ विचार तेज तूफान की तरह हलचल में लाता है। समर्थ श्रेष्ठ विचार सदा बहार के समान हरा-भरा बना देता है। व्यर्थ विचार एनर्जी अर्थात आत्मिक शक्ति और समय गंवा देता है। समर्थ श्रेष्ठ विचार सदा आत्मिक शक्ति अर्थात एनर्जी जमा करता है। समय सफल होता है। व्यर्थ विचारों की रचना करके हम स्वयं ही परेशान हो जाते हैं। निरंतर सकारात्मक विचारों का मनन करते रहे तो समर्थ बुद्धि में व्यर्थ आ नहीं सकता है। लाईट का स्विच ऑन करने से अंधकार समाप्त हो जाता है। ऐसे समर्थ विचारों का स्विच आन करो तो व्यर्थ का अंधकार समाप्त हो जायेगा। खाली बुद्धि होने कारण व्यर्थ आ जाता है। समर्थ विचारों से बुद्धि को बिजी न रखना अर्थात व्यर्थ विचारों का आह्वान करना। किसी से भी वैर का भाव न हो शुभ भावना-शुभ कामना हो। ऐसे शुभ भावना-शुभ कामना वाले सदा निर्भय होते हैं। परमात्मा की याद छत्रछाया है। परमात्मा की छत्रछाया में रहने वाले सदा सेफ हैं। छत्रछाया के अंदर निर्भय है। कार्यक्रम में प्रशिक्षित योगा गुरु विकास सोनी द्वारा शरीर को सम्पूर्ण रोगों से मुक्त करने के लिए सूक्ष्म व्यायाम देशी मसाज, सूर्य नमस्कार, शवासन, हिलिंग मेडिटेशन सिखाया गया। उन्होंने हैपी लाइफ टिप्स बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेषता अवश्य होती है। हर एक की विशेषताओं को सम्मान दे। परिस्थितियों को देखने का नजरिया हर व्यक्ति का अलग-अलग होता है। परिस्थितियों को छोटा व बड़ा करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। स्वयं की खुशी स्वयं के हाथों में है। कोई कहे कि आप अच्छे हो तो खुश हो जाते हैं। अगर नहीं कहे तो हमारी खुशी गुम हो जाती है। कोई कहे न कहे मुझे सदा खुश रहना है। किसी का इंतजार न करें स्वयं को स्वयं ही प्रोत्साहित करे। खुशियां बांटने से बढ़ती है। अगर कोई दूसरे की खुशी को समाप्त करता है तो हो सकता है उसकी खुशी समाप्त हो जाए। दूसरों की खुशियों पर अटैक न कर, खुशियां बांटे।